ट्रम्प के पागलपन से भारत को भी बड़ा नुक्सान

नई दिल्ली! अमरीका के नए सदर डोनाल्ड ट्रम्प ने कई मुल्कों के मुसलमानों के अमरीका में  दाखिले पर पाबंदी लगाई तो आरएसएस कुन्बा और हिन्दुस्तानी मीडिया का एक बड़ा तबका ऐसे खुश हो रहा था जैसे डोनाल्ड ट्रम्प ने मुसलमानों को रोक कर उन्हें अमरीका में बसने का मौका दे दिया हो। डोनाल्ड ट्रम्प के लिए बगलें बजाने वाले इन बेवकूफों ने सोचा भी नहीं था कि डोनाल्ड ट्रम्प किसी का हमदर्द नहीं है। मुसलमानों पर पाबंदी लगाने के तीन दिन के अंदर ही नए अमरीकी सदर ने अपनी नई इमीगे्रशन पालीसी पर दस्तखत कर दिए जिसके जरिए उन्होने एस-वन वीजे पर तकरीबन पाबंदी लगा दी। जिससे सबसे बड़ा नुक्सान हिन्दुस्तान को और हिन्दुस्तान की आईटी इंडस्ट्री को होने वाला है। एक अंदाजे के मुताबिक ट्रम्प की नई पालीसी से आई टी सेक्टर में काम करने वाले हिन्दुस्तानियों को तो नुक्सान होगा ही उस हिन्दुस्तान पर चालीस हजार करोड़ के नुक्सान का बोझ बढेगा। मुलाजिमों में कमी और तिजारत में इतने बड़े नुक्सान से मुल्क का बजट भी चैपट हो सकता है। मुसलमानों के साथ ट्रम्प के रवैए पर खुशियां मनाने वाले फिरकापरस्तों की समझ में नहीं आ रहा है कि ट्रम्प की नई इमीग्रेशन पालीसी पर खुशी का इजहार करें  या रोएं।
ट्रम्प ने मुसलमानों के सिलसिले मंे पागलपन के फैसले पर दस्तखत किए तो अमरीका की पूरी खुफिया मशीनरी उतावली दिखने लगी तकरीबन सभी हवाई अड्डों पर मुसलमान मुसाफिरों को हवाई जहाज मंे चढने से रोक दिया गया इंतेहा यह कि अमरीकी शहरी एक बुजुर्ग खातून सख्त बीमार थीं सीरिया में रहने वाली बेटी अपनी मां को देखने आई तो उसे हवाई अड्डे पर ही रोेक दिया गया। अमरीकी मीडिया  ने इस गैर इंसानी हरकत की सख्त मजम्मत की तो भी अमरीकी हुकूमत और उसके इमीग्रेशन मोहकमे पर कोई असर नहीं हुआ। अमरीकी हवाई अड्डो पर हजारों मुस्लिम मुसाफिरों के फंसे होने की खबर पर दुनिया के कई मुल्कों ने नाराजगी जाहिर की। कनाडा के वजीर-ए-आजम जस्टिन ट्रोडेव एक बार फिर इंसानियत के अलमबरदार बन कर सामने आए। उन्होेने कहा कि अमरीकी हवाई अड्डो पर फंसे मुसाफिरों  को कनाडा  में पनाह देने के लिए तैयार हैं। पूरे अमरीका में ट्रम्प के इन पागलपन के फैसलों पर जबरदस्त गुस्सा है लेकिन ट्रम्प हैं कि उनके कान पर जूं नहीं रेंग रहा उल्टे उन्होने अमरीकी मीडिया को सबक सिखाने की द्दमकी दे डाली। इस मामले मेे डोनाल्ड ट्रम्प ने एक अटार्नी जनरल सेलीयाटिस को इसलिए बरखास्त कर दिया क्योंकि उन्होने ट्रम्प के मुसलमानोें के अमरीका मंेे दाखिले पर पाबंदी लगाने वाले हुक्म का अदालत में बचाव करने से यह कहकर इंकार किया था कि यह अमरीकी आईन और उसके फेडरल निजाम के खिलाफ है। वाजेह हो कि सेलीयाटीस को ओबामा इंतजामिया के दौर में इस ओहदे पर फायज किया गया था। कहा जा रहा है कि अटार्नी जनरल सेलीयाटीस के व्हाइट हाउस के हुक्म का बचाव न करने की जसारत दिखाना एक गैरमामूली वाक्या है। क्यांेकि इससे चैवालीस साल पहले 1973 में उस वक्त के अटार्नी जनरल एलिट रिचर्डसन और उनके डिप्टी ने सदर रिचर्डसन का हुक्म मानने के बजाए अपने ओहदों से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि उन्होनेे कहा था कि वाटर गेट स्कैण्डल मामले में  जांच करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करें।
मुसलमानों के अमरीका मंे दाखिले पर पाबंदी लगाने के फैसले के खिलाफ आम अमरीकियों मे तो गुस्सा और नाराजगी पाई ही जा रही है और उनके एहतेजाजी मुजाहिरोें का सिलसिला हवाई अड्डों और दीगर जगहों  पर जारी है। इसी दौरान एक गैर मामूली वाक्या यह पेश आया कि महज दस दिन पहले व्हाइट हाउस छोड़ने वाले साबिक अमरीकी सदर बराक ओबामा भी अपना मुंह खोलने पर मजबूर हो गए। आम तौर पर अमरीका की यही रिवायत है कि कोई साबिक सदर किसी भी सरकारी फैसले पर अपना रद्देअमल जाहिर करने से परहेज करता है  लेकिन यह चूंकि अमरीकी कद्रों से जुड़ा है और जिसपर हर अमरीकी फख्र करता है ट्रम्प ने अपने हुक्म से इन कद्रों को चोट पहुचाई है इसलिए ओबामा उसके खिलाफ बोलने को मजबूर हुए। ओबामा के तर्जुमान केविन लेविस ने अपने एक बयान में कहा कि सदर ओबामाा की फारेन पालीसी से मौजूदा सदर की फारेन पालीसी का मवाजना किया जाए तो यह किसी फर्द के अकीदे या मजहब के तयीं सरीह खिलाफवर्जी है और साबिक अमरीकी सदर को ऐसे हुक्म से दिली तकलीफ पहुची है और उनका कहना है कि यह अमरीकी कद्रों को दाव पर लगाने जैसा है।
डोनाल्ड ट्रम्प के ओहदा सदारत संभालने के बाद एक तवक्को यह की जा रही थी कि उन्होने अपनी इंतखाबी मुहिम के दौरान अमरीकी अवाम से जो वादे किए हैं उनका ताल्लुक एलक्शन मे महज कामयाबी हासिल करना था लेकिन यह ऐसे लोगोें की खाम ख्याली ही साबित हुई क्योेंकि ट्रम्प ने सबसे पहले ओबामा की हेल्थ केयर पालीसी के खिलाफ आर्डर पर दस्तखत किए फिर मुसलमानों के अमरीका में दाखिले पर पाबंदी लगाने का फरमान जारी कर दिया अगरचे यह तमाम दुनिया के मुसलमानों पर पाबंदी न होकर फिलहाल सिर्फ सात मुस्लिम मुमालिक सीरिया, इराक, ईरान, यमन, लीबिया, सुडान, सोमालिया के अमरीका आने पर नब्बे दिनों की पाबंदी लगाई गई है जबकि सीरिया के पनाहगुजीनों पर यह पाबंदी एक सौ बीस दिन के लिए है। यह हुक्म जारी करने के बाद ट्रम्प इंतजामिया की जानिब से कहा गया था कि यह फैसला अमरीका और अमरीकियों को महफूज रखने के पेशेनजर किया गया है और यह पाबंदी मुसलमानों के खिलाफ नहीं है बल्कि इस्लामी दहशतगर्दों के खिलाफ है और ट्रम्प यह अहद कर चुके हैं कि इस्लामी दहशतगर्दी को खत्म करके ही दम लेगंे। लेकिन ट्रम्प के इस हुक्म के खिलाफ जिस तरह से अमरीका में गुस्सा पाया जा रहा है और पूरी दुनिया मे खासकर यूरोप और दूसरे जम्हूरी मुल्कांे में जिस तरह के मुजाहिरे हो रहे हैं वह अमरीका के लिए शदीद परेशानी वाले साबित हो सकते हैं। पड़ोसी कनाडा ट्रम्प के इस फैसले के सीद्दे तोर पर सामने आ गया है। कनाडा के वजीर-ए-आजम जस्टिन ट्रोडेव ने यह पेशकश कर दी कि जो लोग आरजी तोर पर अमरीकी हवाई अड्डो पर फंसे हुए हैं वह कनाडा आ सकते हैं। उन्होेने साथ में यह भी कहा कि वह जब डोनाल्ड ट्रम्प से आइंदा मिलेंगे तो इस मसले पर भी बात करेंगे। कनाडा की वजीर-ए-आजम  ने ट्वीट कर कहा कि वह लोग जो दहशत, जंग और मुकदमों से बचने के लिए अपने मुल्कों से भाग कर आए हैं कनाडा में उनका इस्तकबाल है इससे कोई मतलब नहीं कि उनका मजहब और अकीदा क्या है। उन्होने कहा कि रंगारंगी उनके मुल्क की ताकत है और कनाडा की तरक्की में बाहर से आने वालों का बहुत अहम रोल रहा है।  जबकि जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल ने इमीग्रेशन पर पाबंदी लगाने को डोनाल्ड ट्रम्प के फैसले को गैर मुंसिफाना करार दिया और कहा कि किसी को भी इसकेे पसमंजर और मजहब की बुनियाद पर निशाना बनाना कतई दुरूस्त नहीं है।
अमरीका की एक फेडरल अदालत ने ट्रम्प के हुक्म पर आरजी तोर पर रोक भी लगा दी है। अपने हुक्म में अदालत ने कहा है कि इमीग्रेशन अफसरों के जरिए हिरासत में लिए गए पनाह गुजीनों और दीगर वीजा वाले लोगोें को वापस भेजे जाने पर आरजी तोर पर रोक लगाई जाती है। वाजेह हो कि डोनाल्ड ट्रम्प के इमीग्रेशन से मुताल्लिक हुक्म के खिलाफ अमरीकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (एसीएलयू) की जानिब से दायर पटीशन पर न्यूयार्क के जिला जज एन डोनले ने यह हुक्म दिया। अदालत ने सरकार को यह हुक्म भी दिया है कि पाबदी लगने के बाद से अमरीकी हवाई अड्डों पर हिरासत में लिए गए सभी लोगों की फेहरिस्त दस्तयाब कराएं। उन्होने कहा कि कहा कि ट्रम्प आर्डर के बाद उन मुसाफिरों को वापस उनके मुल्क भेज देने से उन्हें भारी और नाकाबिले तलाफी नुक्सान पहुच सकता है। जज की जानिब से जारी हुक्म अमरीकी सरहदी एजेंटों को यह हिदायत देता है कि वह इराक, सीरिया, ईरान, सूडान, लीबिया, सोमालिया और यमन के जायज वीजा के साथ अमरीका के किसी भी शख्स को यहां से निकालें नहीं।
इसके बाद ट्रम्प ने एच वन बी वीजा लेने वाले गैर मुल्की पेशावरों के अमरीका आने वालों के हौसले पस्त करने के लिए एक अहम तजवीज भी पेश कर दी। इसके तहत कम्पनियों को अब ऐसे वीजा पाने वालों को  दो गुना तंख्वाह देनी होगी। इस हुक्म से सबसे ज्यादा नुक्सान हिन्दुस्तान को  होने का अंदेशा जाहिर किया जा रहा है। माना जा रहा है कि हिन्दुस्तान में साफ्टवेयर से वाबस्ता कम्पनियों के लिए यह बहुत बड़ा द्दक्का है। क्योंकि उनके लिए हिन्दुस्तानियों की जगह अमरीकियों को नौकरी देना ज्यादा आसान होगा। अगरचे हिन्दुस्तान ने अमरीका की इस तजवीज पर एतराज जताया लेकिन ट्रम्प इंतजामिया के रवैए को देखते हुए इसमें कोई तब्दीली या हिन्दुस्तान के लिए कोई रियायत होगी इमकान नहीं नजर आता। वाजेह हो कि अमरीका की तरफ से हर साल दिए जाने वाले एच वन बी वीजों का सबसे ज्यादा फायदा हिन्दुस्तान की आईटी कम्पनियां ही उठाती हैं। करीब छियासी फीसद वीजे हिन्दुस्तानी कम्पनियों के कोटे में पिछले साल आए थे। कहा जारहा है कि अगर ट्रम्प इंतजामिया इस तजवीज पर अमल करती है तो हिन्दुस्तान के एक सौ पचास अरब डालर की साफ्ट वेयर इंडस्ट्री की कमर ही टूट जाएगी। ट्रम्प इंतजामिया की इस तजवीज के बाद उन अमरीकी भक्तों को सांसे अटकी हुई हैं जो मुसलमानों की अमरीका मे दाखिले पर पाबदी से मुताल्लिक हुक्म के बाद बहुत खुश नजर आ रहे थे।
अमरीकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प के सात मुस्लिम देशों के शहरियों के अमरीका के सफर पर पाबंदी के फैसले के खिलाफ एहतेजाजी मुजाहिरों का जारी रहना साफ इशारा है कि यह फैसला ट्रम्प इंतजामिया के लिए एक आजमाइश की शक्ल अखितयार कर गया है।
न्यूयार्क में होने वाले एहतेजाजी मुजाहिरे में पुलिस के अंदाजे के मुताबिक दस हजार लोगों ने शिरकत की और महाजरीन को खुशआमदीद जैसे नारे लगाए।
नए अमरीकी सदर के लिए उनके जो फैसले एक आजमाइश की शक्ल अख्तियार कर गए हैं, वह उन्होंने अपना ओहदा संभालने के एक हफ्ते बाद एक एक्जीक्यूटिव आर्डर के जरिए मुतारिफ करवाए थे। इस सदारती फरमान पर दस्तखत करते हुए ट्रम्प बाहरी दुनिया से सभी महाजरीन पर कम से कम एक सौ बीस दिनों के लिए और सीरियाई महाजरीन पर गैर मुअय्यना मुद्दत के लिए अमरीका में दाखिले पर पाबंदी लगा दी थी। साथ ही सात मुस्लिम देशों ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के शहरियों पर नब्बे दिन के लिए अमरीका के सफर पर पाबंदी लगा दी था।
खुद ट्रम्प के हामियों ने भी इन पाबंदियां की तंकीद की थी, सरहदी गार्ड्स भ्रम का शिकार हो गए थे और डेमोक्रेट को ट्रम्प को तंकीद का निशाना बनाने का मौका हाथ आ गया था। खुद रिपब्लिकन खेमे में भी बेचैनी नजर आने लगी थी। चार फेडरल जजों ने महाजरीन की  जबरी वापसी रोकने के इकदाम किए जबकि तीन सौ के करीब लोगों को दुनिया भर में अमरीका जाने से रोका या हिरासत में लिया गया और अमरीका में शहरी हुकूक के लिए सरगर्म वकीलों ने खबरदार किया है कि यह मामला मुल्की सुप्रीम कोर्ट तक भी जा सकता है।
अमरीका भर में अहम हवाई अड्डों पर लगातार दो दिन मुजाहिरीन जमा हुए और उन्होंने ट्रम्प के फरमान से मुतास्सिर होने वाले तारकीने वतन और महाजरीन की हिमायत में नारे लगाए।
एक खातून अमरीकी परचम से बना हिजाब पहने न्यूयार्क में ट्रम्प के एहकामात के खिलाफ हुए मुजाहिरे में मुकर्ररीन की तकरीरेें सुन रही है
वाशिंगटन डीसी के पास डलास एयरपोर्ट पर पहुंचने वाले एक इराकी नेजाद अड़तीस साल के अमरीकी शहरी सैफ रहमान को इजाफी स्क्रीनिंग के अमल से गुजारा गया। बाद में इस शहरी ने मीडिया को बताया मैं बस यह उम्मीद करता हूं कि एक मुल्क के रूप में अपनी इकदार को बरकरार रखते हुए हम यह  मुश्किल वक्त गुजारे जाएं।
अमरीका के अहम एयर पोर्ट्स पर वकीलों ने अपने मुतर्जमीन के साथ दुकानें सजा लीं और इन लोगों की रिहाई के लिए कोशिशें शुरू कर दीं जिन्हें अमरीका पहुंचने पर हिरासत में ले लिया गया था। उनमें से कई उस वक्त हवाई जहाज पर अमरीका की तर फ सफर पर थे, जब ट्रम्प ने पिछले दिनांे एक्जीक्यूटिव आर्डर पर दस्तखत किए।
कानूनी वीजे के हामिल होने के बावजूद कम से कम एक सौ नौ लोगों को अमरीका पहुंचने पर हिरासत में ले लिया गया। यह वाजेह नहीं है कि उनमें से मजीद कितने बदस्तूर हिरासत में हैं। ट्रम्प इंतजामिया के अहम मेम्बरान इन मुतास्सिरीन की तादाद कम करके सिर्फ कुछ दर्जन बता रहे हैं जबकि कनाडा ने इस पाबंदी के सबब अपने यहां फंस जाने वाले मुसाफिरों को आरजी रिहाइश फराहम कराने की पेशकश की है। बेरूत हवाई अड्डे के एक अफसर के मुताबिक छः सीरियाई शहरियांें को फिलाडेल्फिया इंटरनेशनल एयरपोर्ट से वापस लेबनान भेज दिया गया।
हर तरफ से तंकीद शुरू हो जाने पर व्हाइट हाउस से यह बयान जारी किया कि यह पाबंदी मुसलमानों पर नहीं है और कहा कि मीडिया इस मामले को उछाल रहा है। बयान के मुताबिक मामला मजहब का नहीं बल्कि दहशतगर्दी और अपने देश को महफूज बनाने का है, मीडिया गलत रिपोर्टिंग कर रहा है।
न्यूयार्क में होने वाले एहतेजाजी मुजाहिरेे में पुलिस के अंदाजे के मुताबिक दस हजार लोगों ने शिरकत की और महाजीरन का इस्तकबाल और होलोकास्ट यानी जर्मनी में यहूदियों के कत्लेआम की तरफ इशारा करते हुए नेवर अगेन या फिर कभी नहीं के नारे लगाए। मैनहट्टन इलाके बैटरी पार्क में हुए इस मुजाहिरे में शरीक डेमोक्रेटिक सीनेटर चार्ल्स और शेमेर ने लोगों को खिताब करते हुए कहा कि ट्रम्प के एहकामात गैर अमरीकी हैं और मुल्की इकदार के खिलाफ हैं। उन्होेने इस मौके पर कहा, हम यहां कई लोगों की जिंदगी और मौत की बात कर रहे हैं। तब तक चैन से नहीं बैठूगा जब तक इन खौफनाक  एहकामात का खात्मा न हो जाए। इस मुजाहिरे में शरीक लोगों ने बाद में न्यूयार्क में अमरीकी कस्टम्स एंड बार्डर प्रोटेक्शन के दफ्
News Posted on: 10-02-2017
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