शिवसेना-भाजपा की राहें हुईं अलग, ठाकरे ने राजग से तोड़ा नाता

 फ़ज़ल इमाम मल्लिक

महीनों से चली आ रही शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी की तल्खी आखिरकार अंजाम को पहुंची. दोनों दलों के बीच रिश्त मधुर नहीं थे. शिवसेना हाल के कुछ महीनों में भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमले कर रही है. शिवसेना ने गुजरात चुनाव के वक्त शिवसेना ने राहुल गांधी के कसीदे पढ़े. उनके भाषणों की तारीफ की. उससे पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से शिवसेना उद्धव ठाकरे ने मुलाकात कर भाजपा को परेशानी में डाला. गुजरात चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर साजिश लगाने की आलोचना की. महाराष्ट्र की सत्ता में शामिल शिवसेना ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए हमला किया. शिवसेना लगातार भाजपा पर हल्ला बोलती रही है. उसने तो भारतीय जनता पार्टी को ‘भ्रष्टाचारी’ बताते हुए ‘घोटालेबाज भाजपा’ भी कहा था. दोनों दलों के बीच खटास भी बढ़ी और दूरी भी. नतीजा सामने है शिवसेना ने राजग से नाता तोड़ कर अगला लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला कर भारतीय जनता पार्टी को सकते में डाल दिया है. शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राजग से अलग होने का फैसला लिया गया. साथ ही पार्टी ने दूसरे राज्यों में भी अकेले चुनाव लड़ने का एलान किया. शिवसेना ने चुनाव हिंदुत्व के नाम पर लड़ने का फैसला कर भाजपा की परेशानी बढ़ाने का मुकम्मल इंतजाम कर लिया है. इस फैसले से महाराष्ट्र की राजनीति पर भी बड़ा असर पड़ेगा. महाराष्ट्र सरकार के अलावा बंबई नगर निगम में दोनों पार्टियां गठबंधन से सरकार चला रही हैं. शिवसेना ने यह फैसला तब किया, जब पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया है. इसे शिवसेना की विरासत सौंपने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है. केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाली सरकार से गठबंधन तोड़ने के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बिना लाग-लपेट के कहा कि हम हिंदुत्व के लिए हर राज्य में चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने कसम खाई कि वे हिंदुत्व का मुद्दा राज्यों में उठाएंगे. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जम कर बरसे. उन्होंने कहा प्रधानमंत्री खुद को पंत प्रधान कहते हैं. लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री को अहमदाबाद ले गए वे उन्हें श्रीनगर के लाल चौक क्यों नहीं ले गए. प्रधानमंत्री ने श्रीनगर में रोड शो क्यों नहीं किया. क्या उन्होंने लाल चौक पर तिरंगा फहराया है. ठाकरे ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर भी नौसेना का अपमान करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सेना के जवानों का सही में सीना छप्पन इंच का है. आप कैसे उनका अपमान कर सकते हैं. शिवसेना के इस फैसले को हालांकि बहुत हैरत से नहीं देखा जा रहा है. दोनों दलों के बीच लंबे समय से तल्खी चली आ रही थी. शिवसेना केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की फडणवीस सरकार की लगातार आलोचना करती रही है. नोटबंदी, जीएसटी जैसे केंद्र सरकार के फैसलों पर भी शिवसेना लगातार हमले करता रही है. तल्खी इस हद तक बढ़ी दोनों दलों में कि शिवसेना ने परंपरागत राजनीतिक विरोधी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ करने में भी कंजूसी नहीं की. महाराष्ट्र विधानसभा और बंबई नगर निगम चुनाव दोनों दलों ने अलग-अलग लड़ा था. बंबई नगर निगम का चुनाव भी इस तल्खी के माहौल में लड़ा गया था. भाजपा ने शिवसेना को कड़ी टक्कर दी. विधानसभा चुनाव की तरह नगर निगम चुनाव में भी किसी दल को बहुमत नहीं मिला. तब शिवसेना ने भाजपा के सहयोग से नगर निगम की सत्ता पर काबिज हुई. राजग से संबंध तोड़ने का एलान शिवसेना की के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने किया. महाराष्ट्र सरकार में भाजपा और शिवसेना गठबंधन के 185 विधायक हैं. इनमें 122 बीजेपी के, 63 शिवसेना के विधायक हैं. विधानसभा में कांग्रेस के 42, और एनसीपी के 41 विधायक हैं. शिवसेना के एलान के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ गई है. सवाल यह भी है कि शिवसेना महाराष्ट्र सरकार और नगर निगम की सत्ता से भी अलग होगी. वैसे इसके आसार कम नजर आ रहे हैं. सियासी तौर पर इसे दबाव की राजनीति भी माना जा रहा है. राजग से अलग होने का फैसला करने के बावजूद अभी तक शिवसेना में महाराष्ट्र सरकार और निगम को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं. देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र में सियासत क्या रंग दिखाता है. शिवसेना ने अपने पत्ते खोल डाले है. अब बारी भारतीय जनता पार्टी की है.

News Posted on: 23-01-2018
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