चार राज्यों में फ़िल्म पद्मावत की रिलीज़ पर लगा बैन सुप्रीम कोर्ट ने हटाया,मोदी भरोसे 'पद्मावत' को 'फ़ना' करना चाहती है करणी सेना?

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की  जजों के बाद इनके फैसले की अवामी बगावत से पुरे देश में हड़कंप

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद 25 जनवरी को पद्मावत की देशभर में स्क्रीनिंग होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर फिल्म विवाद से जुड़े पक्षों के मिले-जुले रिएक्शन आ रहे हैं। करणी सेना के चीफ लोकेंद्र कालवी ने कहा कि 25 जनवरी को को जनता देश में कर्फ्यू लगा देगी। इस बीच, बिहार के मुजफ्फरपुर में करणी सेना के सपोर्टर्स ने एक सिनेमा हॉल में तोड़फोड़ भी की। उधर, कांग्रेस ने कहा कि उम्मीद है कि राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करेगी।

बता दें कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में बैन लगाने के खिलाफ फिल्म के प्रोड्यूसर्स ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की थी। गुरुवार को इस पर सुनवाई करते वक्त सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्यों के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी।

करणी सेना: राजपूत करणी सेना के चीफ लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा, "पूरे देश के सामाजिक संगठनों से अपील करूंगा कि पद्मावत चलनी नहीं चाहिए। फिल्म हॉल पर जनता कर्फ्यू लगा दे।

कांग्रेस: कपिल सिब्बल ने कहा, "ये कलाकार की बोलने और अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर है। कलाकार की बोलने की स्वतंत्रता को कायम रखने और कहानी को जिस तरह वो दिखाना चाहता है, उसी रूप में दिखाने की आजादी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट को बधाई दी जानी चाहिए। उम्मीद है कि राज्य सरकारें फैसले का सम्मान करेंगी और इसे लागू करने में कोई बाधा नहीं खड़ी करेंगी।

" राजस्थान सरकार: गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हम इससे बंधे हुए हैं। मैं और मेरा डिपार्टमेंट लीगल प्रोविजंस को देखेगा। सुप्रीम कोर्ट का डिसीजन पढ़ने के बाद अगर कोई रास्ता निकला, तो हम आगे बढ़ेंगे।" हरियाणा सरकार: स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने बगैर हमारा पक्ष सुने फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट सबसे ऊपर है तो हम इस फैसले से बंधे हुए हैं। हम इस फैसले को एग्जामिन करेंगे और देखेंगे कि इसके खिलाफ अपील हो सकती है या नहीं।

" मधुर भंडारकर:ये बहुत बढ़िया खबर है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मैं स्वागत करता हूं। मुझे उम्मीद है कि राज्य सरकारें फिल्म देखने वालों के लिए सुरक्षा मुहैया कराएगी, ताकि रिलीज में कोई परेशानी ना हो।

किन राज्यों में लगा था बैन? पद्मावत की रिलीज पर मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात सरकार ने बैन लगाया था।

SC ने क्या फैसला सुनाया?

गुरुवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने मामले की सुनवाई की। बेंच में जस्टिस खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ भी थे। SC ने मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात सरकारों के उन नोटिफिकेशंस पर भी स्टे लगा दिया है, जिनमें फिल्म रिलीज ना होने देने का ऑर्डर दिया गया था। बेंच ने कहा कि लॉ एंड ऑर्डर का मामला राज्य देखें।

प्रोड्यूसर्स ने क्या दलील दी? प्रोड्यूसर्स के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि वो केंद्र सरकार से गुजारिश करते हैं कि वो राज्यों के लिए डायरेक्शन जारी करे ताकि फिल्म की रिलीज में कोई दिक्कत पेश ना आए। हरीश साल्वे ने कहा- अगर राज्य ही फिल्म को बैन करने लगेंगे तो इससे फेडरल स्ट्रक्चर (संघीय ढांचे) तबाह हो जाएगा। यह बहुत गंभीर मामला है। अगर किसी को इससे (फिल्म से) दिक्कत है तो वो संबंधित ट्रिब्यूनल में राहत पाने के लिए अपील कर सकता है। राज्य फिल्म के सब्जेक्ट से छेड़छाड़ नहीं कर सकते। प्रोड्यूसर्स की तरफ से इस मामले में हरीश साल्वे और मुुकुल रोहतगी ने दलीलें पेश कीं।

साल्वे ने कहा- जब सेंसर बोर्ड फिल्म को सर्टिफिकेट दे चुका है तो राज्य सरकारें इस पर बैन कैसे लगा सकती हैं? मामले की अगली सुनवाई मार्च में होगी। मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा की बीजेपी सरकार ने फ़िल्म पद्मावत पर बैन लगाया था. हालांकि फ़िल्म को सेंसर बोर्ड ने कुछ बदलाव के साथ हरी झंडी दिखाई थी, जिसके बाद फ़िल्म का 25 जनवरी को रिलीज़ होना तय हुआ है.

'पद्मावत' का विरोध करने वालों में करणी सेना का नाम सबसे ऊपर है. सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकारों को 'पद्मावत' को रिलीज़ करने का आदेश देने के बाद करणी सेना की क्या प्रतिक्रिया है? करणी सेना के प्रमुख लोकेंद्र काल्वी से यही जानने की कोशिश की. हम जनता की अदालत में पहले ही गए हुए हैं. जिस दिन पद्मावत फ़िल्म रिलीज़ होगी, उस दिन हम फ़िल्म के ख़िलाफ जनता कर्फ्यू लगाएंगे. देश के सभी सिनेमाघरों में खून से लिखे ख़त मिलेंगे कि ऐतिहासिक तथ्यों से तोड़-मरोड़ में आप सहयोगी न बनें. पिछली बार फ़ना, जोधा-अक़बर फ़िल्म के दौरान गुजरात और राजस्थान में जनता कर्फ्यू लगा था. हमें पद्मावत फ़िल्म से पहले और अब भी दिक्कत ही दिक्कत है. जब सरकारें इसे बैन नहीं कर रही थीं, तब भी और जब इसे बैन कर दिया गया, तब भी.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की हमें विवेचना करने दीजिए. शुक्रवार को इस बारे में हम मुंबई में एक मीटिंग रखेंगे. सुप्रीम कोर्ट पर हमें अविश्वास नहीं है. बॉम्बे, इलाहाबाद और राजस्थान हाईकोर्ट ने कुछ और कहा है. तीनों कोर्ट कुछ और बात करती हैं और सुप्रीम कोर्ट ने कुछ और कहा है. हमारा स्टैंड तब भी वही था, आज भी वही है. जनता कर्फ्यू लगाएगी और पद्मावत फ़िल्म को रिलीज़ नहीं होने दिया जाएगा. मैंने पद्मावत फ़िल्म नहीं देखी है लेकिन पद्मावती के परिवार अरविंद सिंह, कपिल कुमार, चंद्रमणि सिंह ने फ़िल्म देखी है. इन तीनों ने कहा है कि फिल्म रिलीज़ नहीं होनी चाहिए. 'वो अलाउद्दीन खिलजी ही रहता है' पद्मावती से आई हटाकर नाम पद्मावत कर देने से कुछ नहीं होता. वो पद्मावती, जौहर, और चित्तौड़ ही रहता है. वो अलाउद्दीन खिलजी ही रहता है. जायसी का पद्मावत फैंटेसी नहीं, इतिहास है.

भंसाली की बात पर यकीन किया जा रहा है, मुझे इसपर आश्चर्य है. मैं किसी ईट, पत्थर, गधे, घोड़े और उल्लू पर यकीन कर सकता हूं लेकिन संजय लीला भंसाली पर यकीन नहीं कर सकता. पद्मावत फ़िल्म पर आप और हम कोई फैसला न दे तो ही अच्छा रहेगा. ये जनता फ़ैसला करेगी. आप पहले हुई रिलीज़ फ़िल्में जोधा अकबर और फ़ना को देख लीजिए. राजस्थान में जोधा अकबर और गुजरात में फ़ना नहीं चली. ये दोनों फ़िल्में भी सुप्रीम कोर्ट से आदेशित और सेंसर बोर्ड से पास थीं. लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजरात में फिल्म लगने से रोक दी. राजस्थान में जोधा अकबर हमने रोक दी. अब भी प्रधानमंत्री से- सिनेमाटोग्राफी एक्ट के सेक्शन 6, जो उनको ताकत देते हैं कि सेंसर बोर्ड से पास और सुप्रीम कोर्ट भी उसमें दखल न दें. ऐसी व्यवस्था केंद्रीय कैबिनेट के पास है.

News Posted on: 18-01-2018
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