योगी जी आए तो बांटा गरीबों को कंबल,लौटते ही वापस ले लिया

फ़ज़ल इमाम मल्लिक

योगी आदित्यनाथ प्रदेश को भगवा रंग में रंगने में लगे हैं. कुछ हो रहा है या न हो रहा है, योगी आदित्यनाथ यह काम बखूबी कर रहे हैं. जिसे देखो और जिधर देखो भगवा रंग चढ़ाया जा रहा है. योगी आदित्यनाथ के मंत्री हैं मोहसिन रजा. उन्हें भगवा से कुछ ज्यादा ही प्रेम है. उनका तर्क है कि भगवा रंग उजाला देता है. उससे नई ऊर्जा मिलती है. यह अलग बात है कि मोहसिन रजा ने अपने आफिस को चटख भगवा रंग से रंगवाया है. एक-दो दिन पहले हज भवन पर भी भगवा रंग चढ़वा दिया है. लेकिन जिस ऊर्जा की बात वे करते हैं कम से कम उनके कामकाज से तो पता नहीं ही चलता है. हो सकता है कि इसकी वजह यह हो कि वे खुद भगवा नहीं पहनते हैं. न ही योगी आदित्यनाथ के अधिकारी पहनते हैं. इसलिए सरकारी दफ्तरों की दीवारें तो ऊर्जा से लबालब हैं लेकिन अधिकारी और मंत्री में वह ऊर्जा नहीं दिखाई देती और न ही संवेदनशीलता. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधिकारियों ने पहले भी ऐसा कुछ किया था जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे थे. अब फिर उनके अधिकारियों ने ऐसा किया है जिससे उनकी सरकार की फजीहत हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में योगी आदित्यनाथ के आने से पहले रैन बसेरों में रहने वाले गरीबों को प्रशासन ने कंबल बांटे. ताकि मुख्यमंत्री को दिखाया जा सके कि कड़ाके की ठंड में गरीबों का ध्यान सरकार रख रही है. लेकिन मुख्यमंत्री के जाते ही अधिकारियों ने कंबल, तकिए और गद्दे वापस ले लिए. अधिकारियों की संवेदनहीनता की बात सामने आई तो पार्षद उनके बचाव में आ गए. पार्षद का कहना था कि उनके बेहतर रख-रखाव के लिए उनसे कंबल-तकिए वापस लिए गए हैं. रात में फिर उन्हें कंबल-तकिए व गद्दे दे दिए जाएंगे, ताकि वह सुरक्षित रहे. योगी आदित्यनाथ रैन बसेरों का जायजा लेने बनारस में थे. उनके आने से पहले अधिकारियों ने गंगा तट के आसपास के रैन बसेरों में गद्दे, कंबल और तकिया बंटवा दिए ताकि मुख्यमंत्री खुश हों, और शाबाशी दें. अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए रैन बसेरे तक बनवा डाले. लोगों का कहना है कि यह सब कुछ मुख्यमंत्री के आने से कुछ घंटे पहले किया किया गया. लेकिन योगी आदित्यनाथ गंगा तट के रैन बसेरों का मुआयना करने की बदाय अलाईपुर के रैन बसेरा पहुंच गए. मुख्यमंत्री ने दशश्‍वमेध घाट का निरीक्षण तो किया, लेकिन वहां के रैन बसेरों में नहीं गए. अधिकारियों ने अगली सुबह कंबल और गद्दे वापस ले लिए. इसे लेकर विवाद पैदा हो गया. रैन बसेरे में रहने वालों में गुस्सा है. यह पहला मौका नहीं है जब अधिकारियों ने ऐसा किया है. पहले भी इस तरह का काम अधिकारी कर चुके हैं. इससे पहले देवरिया में बीएसएफ हेड कॉन्‍स्टेबल शहीद प्रेम सागर के घर में एसी, सोफा और कालीन केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन के मद्देनजर लगाया गया था. अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के जाते ही एसी, सोफा और कालीन हटवा लिया था. देवरिया प्रशासन ने शहीद के मेहमान कक्ष में नए परदे, एसी, सोफा और कालीन लगाया था. मुख्यमंत्री को यहां परिवारवालों से मिलना था. मुख्यमंत्री के आगमन के एक दिन पहले गांव की गंदी सड़कों को साफ किया गया. अकसर खुले रहने वाले मेनहोल बंद किए गए. लेकिन शहीद के घर से मुख्यमंत्री के विदा होते ही प्रशासन उनके घर लगाया सारा सामान वापस ले गया. कुशीनगर के दौरे के समय भी अधिकारियों ने इसी तरह का काम किया. योगी आदित्यनाथ कुशीनगर के मुसहर बस्ती में जाने वाले थे. उनकी यात्रा से पहले बस्‍ती के लोगों के बीच साबुन और शैंपो बांटे गए. उन्‍हें मुख्‍यमंत्री के सामने नहाकर आने को कहा गया. जिला प्रशासन ने मुसहर बस्‍ती के लोगों को साफ-सफाई का विशेष खयाल भी रखने को कहा था. अब ताजा मामला कंबलों के वापस लेने का है. योगी आदित्यनाथ के मंत्री भले भगवा रंगों से ऊर्जा आने की बात कर रहे हों लेकिन योगी के भगवा रंग धारण करने की वजह से उनके अधिकारियों में ऊर्जा नहीं आ पा रही है.

News Posted on: 07-01-2018
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