राजस्थान उपचुनाव में वसुंधरा राजे की साख दांव पर

 फ़ज़ल इमाम मल्लिक

राजस्थान में विधानसभा चुनाव यों तो इसी साल होने वाले हैं. लेकिन इससे पहले तीन उपचुनाव होने हैं. इन उपचुनावों में प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की साख दांव पर लगी है. कांग्रेस भी इन उपचुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरने की जुगत मे है. दरअसल उपचुनाव दोनों ही पार्टियों के लिए लिटमस टेस्ट है. विधनसभा चुनव की तैयारी के तौर पर भी इन उपचुनावों को देखा जा रहा है. उपचुनाव के लिए 29 जनवरी को वोट डाले जाएंगे. उपचुनाव लोकसभा की दो सीटों और विधानसभा की एक सीट के लिए होंगे. प्रदेश के अलवर और अजमेर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा के लिए उपचुनाव होंगे. माना जा रहा है कि उपचुनाव में दोनों ही दल पूरी दमखम के साथ मैदान में उतरेंगे क्योंकि इसके नतीजे ही अगले विधानसभा चुनाव की तसवीर भी साफ करेंगे. कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दमदार उम्मीदवार उतारने के पक्ष में हैं. भाजपा ने तो उपचुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी के मुताबिक उम्मीदवारों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया गया है. एक-दो रोज में उम्मीदवारों का एलान कर दिया जाएगा. ऐसा कहा जा रहा है कि अलवर संसदीय सीट से प्रदेश के मंत्री डा. जसवंत यादव और अजमेर से दिवंगत सांसद सांवर लाल जाट के बेटे रामस्वरूप को उम्मीदवार बनाया जा सकता है. मांडलगढ़ विधानसभी सीट पर भीलवाड़ा जिला अध्यक्ष शक्ति सिंह की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है. भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रदेश में वसुंधरा सरकार के काम को लेकर हम उपचुनाव में उतरेंगे. कुछ दिन पहले धौलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा बड़े अंतर से जीती थी. उपचुनाव के मद्देनजर वसुंधरा राजे ने अजमेर, अलवर और मांडलगढ़ क्षेत्रों का लगातार दौरा कर समाज के सभी तबकों को साधने की कोशिश की है. हालांकि कांग्रेस का दावा है कि इन तीनों जगहों पर भाजपा की हालत खराब है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के लिए भी यह चुनाव काफी महत्त्वपूर्ण है. लेकिन इस चुनाव में सरकार की परेशानी बेरोजगार बढ़ा सकते हैं. राज्य के बेरोजगार युवाओं के संगठन ने भी उपचुनाव में उतरने का एलान किया है. राजस्थान एकीकृत बेरोजगार महासंघ ने दो सीटों पर उम्मीदवारों का एलान भी कर दिया है. इससे चुनाव दिलचस्प हो गया है. राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ ने अजमेर और माडंलगढ़ सीट के लिए उम्मीदवारों का एलान कर दिया है. महासंघ का कहना है कि उसके दोनों उम्मीदवार स्थानीय और बेरोजगार हैं. महासंघ ने अजमेर से हरीश चंद्र त्रिपाठी और मांडलगढ़ से हरिलाल को उम्मीदवार बनया है. महासंघ ने अलवर से अभी अपने उम्मीदवार का एलान नहीं किया है. अजमेर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए गए हरीश त्रिपाठी बीए बीएड हैं और अरसे से बेरोजगार हैं, जबकि माडंलगढ़ से उम्मीदवार बनाए गए हरिलाल जाट भी शिक्षित बेरोजगार हैं और रोजगार नहीं मिलने से युवाओं को संगठित कर सरकार के खिलाफ अरसे से संघर्ष कर रहे हैं. बेरोजगार महासंघ ने प्रदेश में सरकारी नौकरियों मे भर्ती के लिए कई बार आंदोलन किया है. महासंघ का गुस्सा भाजपा सरकार के खिलाफ है. सरकार ने सत्ता में आने से पहले पंद्रह लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था लेकिन चार साल बाद भी हालात जस के तस हैं और एक भी युवा को सरकारी नौकरी नहीं दी गई है. महासंघ बेरोजगारी पर राज्य सरकार को घेरने मे सड़कों पर तो लगा ही है, अब चुनावों में भी उसके लिए परेशानी का सबब बन रहा है. भाजपा महासंघ के चुनाव में उतरने के फैसले से सांसत में है.

News Posted on: 06-01-2018
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