इज़राईल से मिलकर मोदी सरकार का समुद्र के पानी को मीठा बनाने की तकनीक का नया घोटाला बना चर्चा ?

सोशल मीडिया पर इन दिनों यह दावा वायरल है कि जल्द ही भारत में पानी की कोई कमी नहीं रहेगी
दिल्ली -पानी का संकट भारत की बड़ी समस्याओं में से एक है. देश में भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है. मॉनसून के दौरान कई इलाकों में अपर्याप्त बारिश होने की घटनाएं बढ़ रही हैं. जानकारों के मुताबिक इसके अलावा पानी के इस्तेमाल को लेकर समाज का लापरवाह रवैय्या भी पानी के संकट को बढ़ा रहा है.
लेकिन जल्द ही भारत में पानी की कोई कमी नहीं रहेगी, यह दावा इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है. दावा इज़रायल और भारत सरकार के बीच तीन साल पहले हुए एक समझौते की ख़बर के हवाले से किया जा रहा है. ख़बर के मुताबिक़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़रायली तकनीक की मदद से पानी से जुड़ी भारत की तमाम समस्याओं का ख़ात्मा करने वाले हैं. इस तकनीक को डिसैलिनेशन (विलवणीकरण) कहते हैं जिसके ज़रिए समुद्र के पानी को खेती जैसे कार्यों और पीने के योग्य बनाया जाता है. न्यूज़ पोर्टल पोस्टकार्ड ने इस ख़बर को इस तरह लिखा है कि लगता है वर्तमान केंद्र सरकार भारत की पहली सरकार है जो यह तकनीक ला रही है.लेकिन इस तकनीक के घोटाले भी सामने आ रही. 
पोस्टकार्ड के मुताबिक यह तकनीक थोड़ी महंगी ज़रूर है, लेकिन जिन देशों के पास यह तकनीक है वे इससे काफ़ी संतुष्ट हैं. उसका दावा है कि इससे पर्यावरण को कोई नुक़सान नहीं होता और न ही यह किसी के जीवन (या सेहत) के लिए हानिकारक है. यह भी बताया गया है कि अहमदाबाद में इस तकनीक पर काम शुरू भी हो चुका है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते साल जुलाई में अपनी इज़रायल यात्रा के दौरान एक जल उपचार संयंत्र में गए थे. इसे लेकर कई लोगों ने उनकी आलोचना की थी. कुछ ने उनका मज़ाक़ भी उड़ाया था. पोस्टकार्ड की खबर में उन लोगों पर कटाक्ष भी किया गया है. ख़बर में कहा गया है कि दूसरे नेता और सरकारें पानी के मुद्दे पर समाज को तोड़ने का काम करते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी पहले नेता हैं जो इस पानी की समस्या को पूरी तरह दूर करने वाले हैं. इस ख़बर में मोदी सरकार के इस क़दम को एक जटिल समस्या का ‘साधारण, लेकिन प्रभावी और उत्कृष्ट हल’ बताया गया है. पोस्टकार्ड लिखता है, ‘हम डिसैलिनेशन तकनीक का और इंतज़ार नहीं कर सकते. भारत के पास अपनी ज़रूरत का सारा पानी उपलब्ध होगा.’
डिसैलिनेशन की तकनीक से भारत में पानी की सभी समस्याएं दूर होंगी या नहीं, यह एक अलग बहस का विषय है. फ़िलहाल तो यह जानना ज़रूरी है कि क्या केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पहली सरकार है जो यह तकनीक ला रही है. जांच करने पर पता चलता है कि तमिलनाडु में पहले से दो प्लांट मौजूद हैं जहां समुद्र के पानी को सामान्य जल में परिवर्तित किया जा रहा है. एक प्लांट मिंजुर में है और दूसरा नेमेली में. मिंजुर सीवॉटर डिसैलिनेशन प्लांट 2010 में शुरू हुआ और नेमेली सीवॉटर डिसैलिनेशन प्लांट 2013 में. दोनों का ट्रायल इनके शुरू होने से पहले से चल रहा था. मिंजुर स्थित प्लांट तो 2009 में ही शुरू होना था. लेकिन 2008 में आए चक्रवात निशा की वजह से इसे शुरू होने में एक साल और लग गया.
 
2010 और 2013 में केंद्र में भाजपा की नहीं कांग्रेस की सरकार थी. वहीं, तमिलनाडु में 2010 में एम करुणानिधि मुख्यमंत्री थे जबकि 2013 में दिवंगत जयललिता. साफ़ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जुलाई 2017 के इज़रायल दौरे से काफ़ी पहले देश में खारे पानी को मीठा बनाने की तकनीक पर काम शुरू हो चुका था. जहां तक पानी की सभी समस्याओं से छुटकारा मिलने की बात है तो विशेषज्ञों के मुताबिक़ यह तकनीक नाकाफ़ी है. उनका मानना है कि डिसैलिनेशन से पानी की समस्या को कुछ हद तक ही दूर किया जा सकता है और यह हद भी पीने के पानी के संबंध में लागू होती है. देश के बड़े हिस्से में खेती की जाती है और डिसैलिनेशन तकनीक के ज़रिए उसकी ज़रूरत जितना पानी प्राप्त नहीं किया जा सकता. अगर ऐसा हो सकता तो कावेरी नदी के बंटवारे को लेकर चल रहा विवाद वाक़ई ख़त्म हो जाता.
लेकिन विपक्ष इसको पानी घोटाले की कह कर तैयारी कर रहा है। 

News Posted on: 06-01-2018
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