आल इंडिया मुशायरा के काबीना मंत्री अरविंद सिंह गोप बने दूल्हा,अजय वर्मा सहबाला,तो सांझी विरासत अवार्ड मुकेश सिंह ने पाया

बाराबंकी-दुनिया के मशहूर शायर ख़ुमार बाराबंकवी की सरज़मींन पर बीती शाम जीआईसी आडीटोरियम में साझी विरासत के तत्वाधान में आयोजित आल इण्डिया मुशायरा व कवि सम्मेलन में श्रोताओं का हुजूम उमड़ा। कवि शिव सिंह सरोज की स्मृति में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का दीप प्रज्जवति कर शुभारम्भ करते हुए पूर्व कबीना मंत्री अरविन्द सिंह गोप ने कहा कि इस इस तरह के आयोजन हमारी गंगा जुमनी संस्कृति को और बढ़ावा देते है। इस अवसर पर सामाजिक कार्यो के लिए किसान नेता मुकेश सिंह को साझी विरासत अवार्ड से नवाजा गया।
हिन्दी संस्थान की पूर्व निदेशक विद्या बिन्दू सिंह, दुबई से आये सोशल एक्टिीविस्ट सैय्यद फरहान वास्ती,जिला बार अध्यक्ष सुरेन्द्र प्रतापसिंह बब्बन व प्रसिद्ध उद्योगपति सुशील अग्रवाल, नेत्र सर्जन डाॅविवेक कुमार को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन गयासुद्दीन किदवई ने साझी विरासत के सभी अराकीन को इस भव्य आयोजन के लिए मुबारकबाद देते हुए कहा कि बाराबंकी में आयोजित ये आल इण्डिया कवि सम्मेलन व मुशायरा पूरी दुनिया में भाईचारे का एक अच्छा संदेश वाहक बनेगा।  मुशायरे का संयोजन तेज़ तर्रार वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद ने किया।
मुशायरे व कवि सम्मेलन में पसन्द किये जाने वाले शायर व कवियों के कलाम के कुछ शेर प्रस्तुत है
मशहूर शायर ताहिर फराज ने फरमाया- आईने टूट गये अक्स की सच्चाई पर, और सच्चाई हमेशा की तरह राज रही।
नईम अख्तर खादमी ने कुछ इस तरह हालात की ओर इशारा किया-ये पानी किस तर कश्ती में आया,अगर सुराख कश्ती में नहीं है।
फिल्मी दुनिया के प्रसिद्ध गीतकार तनवीर गाजी ने पढ़ा- हवा बन के मेरे पास आ तुझे खुशबू बना दूंगा, तू कोई भी जुबा हो तुझे उर्दू बना दूंगा।
निजामत कर रहे नदीम फर्रूख का शेर था- उस ने भी सब के साथ मेरी की मुखालफत, जिस के लिए मै सारे जमाने से लड़ गया।
हामिद भुसावली ने कुछ इस तरह कहा- कहानी को कोई तुम कोई मोड दो ना, बुरे है हम तो हम को छोड़ दो ना।
मुशायरे को लूट लेने वाले युवा शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने फरमाया- चाक है जिगर फिर भी आयेंगे रफू करके,जायेंगे हकीकत से रूबरू करके।
हाशिम फिरोजाबादी का यह शेर काफी मकबूल हुआ- एै खाके वतन तेरे निगेहबान बहुत है, भारत की हिफाजत को मुसलामान बहुत है।
सबा बलरामपुरी के गीतों व गजलो का श्रोताओं ने खूब आनन्द लिया उनका शेर था- मुश्किल बहुत था यूं तो बगावत का फैसला, लेकिन तुम्हारे प्यार ने मजबूर कर दिया।
खुर्शीद हैदर ने कहा- किसी की ताजपोशी हो रही है, कोई घर से निकाला जा रहा है।
 मीसम गोपालपुरी ने भी मुशायरा लूट लिया, उन्होंने कहा- उन से कहो वो जो भगाने पे तुले हैं, हम नहीं छेाड़ के इस मुल्क को जाने वाले।
मुकामी शायर उसमान मीनाई भी छा गये उनका शेर था- मर्ज कोई निकलता है न बीमारी है, तुम्हारे एक्सरे में सिर्फ मक्कारी निकलती है।
सगीर नूरी ने पढ़ा- तेवर बदल गये,लहजा बदल गया, दौलत मिली तो,दोस्तों क्या क्या बदल गया़।
प्रसिद्ध कवि प्रमोद तिवारी ने पढ़ा-याद बहुत आते हैं गुड़ियां गुड्डे वाल दिन, दस पैसे में दो चूरन की पुड़ियों वाले दिन।
इसके अलावा गजेन्द्र, प्रियांशु,अंजनी कुमार शेष आदि कवि व शायरों ने अपना कलाम पेश किया।
मुशायरे में मुख्य रूप से राजेश यादव राजू एमएलसी, पूर्व विधायक रामगोपाल रावत, जिलाध्यक्ष डाॅ कुलदीप सिंह, एडीएम अनिल कुमार सिंह,चौधरी मेराजुद्दीन एडवोकेट,वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमीर हैदर, पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल शुक्ल्, बृजेश दीक्षित, समाज सेवी सरताज चौधरी,मुख्तार शाह,आफाक अली, ताजबाबा राईन, इजहार हुसैन, सैय्यद सुहेल, मजहर अजीज खां,चौधरी अदनान, वजाहत अली अलवी,कलीम किदवई, शकील सिद्दीकी,अतीक अहमद, फैसल नाजिर आदिल उपस्थित थे।

News Posted on: 17-12-2017
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