अब हिंदू कट्टरवाद पर कम्बख्त तसलीमा नसरीन का हमला

फ़ज़ल इमाम मल्लिक
बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन ने अब हिंदू कट्टरवाद पर हमला बोला है. मुसलिम कट्टरपंथ के खिलाफ वे लगातार लिखती रही हैं. अपने विवादास्पद लेखन के लिए वे जानी जाती हैं और इसी वजह से ही उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा. उनकी जान को वहां खतरा था और कट्टरपंथियों ने उन्हें मारने की धमकी तक दी थी. वे निर्वासन का जीवन बिता रही हैं. स्वीडन ने उन्हें नागरिकता दी है. भारत में उन्होंने शरण ले रखी है. उनके भारत में शरण लेने पर कई मुसलिम संगठनों ने एतराज भी किया था. लेकिन सारी आपत्तियों को दरकिनार कर तसलीमा नसरीन को केंद्र की सरकारों ने शरण दिया. उनकी किताब पर प्रतिबंध भी लगा.
मुसलिम कट्टरवाद पर वे लगातार लिखती रही हैं. ‘लज्जा’ उनका मशहूर उपन्यास है. ‘लज्जा’ ने उन्हें शोहरत भी दी और निर्वासन भी. सारे विरोध के बावजूद तसलीमा लगातार लिखती रही हैं और सामाजिक मुद्दों को उठाती रहीं हैं. अपनी आत्मकथा को लेकर भी तसलीमा नसरीन चर्चित रहीं. उसे लेकर भी कई तरह के विवाद उठे. लेकिन तसलीमा बिना विचलित हुए लिखती रहीं. अब अपने ताजा आलेख में उन्होंने हिंदू कट्टरवाद पर निशाना साधा है.
तसलीमा नसरीन दरअसल राजस्थान के राजसमंद में हुई घटना को लेकर विचलित हैं. वे लिखती हैं कि इसी तरह की सियासत ने हिंदुस्तान को बांटा था और लगता है कि एक बार फिर वैसा होता दिख रहा है. तसलीमा नसरीन ने अफराजुल की हत्या का मामला उठाते हुए लिखा कि ठीक आईएसआईएस आतंकियों की तरह उसकी हत्या कर वीडियो को सोशल मीडिया पर डाला गया. तसलीमा ने शंभूलाल का जिक्र किया और लिखा कि आखिर उसके अंदर आईएसआईएस जैसी हिम्मत कहां से आई. उसे पता था कि वह जो कर रहा है उसके लिए उसे सजा नहीं होगी, बल्कि उसके पक्ष में लोग खड़े होंगे. उसकी पीठ थपथपाएंगे. तसलीमा के मुताबिक जब मैंने इस घटनी की ट्वीटर पर निंदा की तो बहुत सारे लोग शंभूलाल के पक्ष में खड़े हो गए.
गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों की हत्या के खिलाफ लिखने पर भी मुझे धमकियां मिलीं. तसलीमा गंभीर सवाल उठाती है. उनका कहना है कि तब उन्हें धमकाया गया. उनसे कहा गया कि भारत में रह कर हिंदुओं के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल सकतीं. सच तो यह है कि इस वक्त भारत में इनटॉलरेंस चरम पर है. इससे पहले भी मैंने हिंदू रीति-रिवाजों पर सवाल उठाए थे लेकिन मुझे धमकियां कभी नहीं मिली थीं. तसलीमा बढ़ती असहिष्णुता पर चिंतित दिखीं. उनके मुताबिक नफरत भी इसी रफ्तार से बढ़ रही है. फिल्म ‘पद्मावती’ के विरोध को भी इसी की एक कड़ी मानती हैं. तसलीमा का कहना है कि शंभूलाल के जुर्म को टीवी चैनलों ने किसी आम हत्या की तरह दिखाया लेकिन यह सामान्य हत्या नहीं थी. यह अलग तरह का जुर्म था. मारने वाले को किसी तरह का डर नहीं था. तसलीमा ने उसका समर्थन कर रहे लोगों की मानसिकता पर सवाल उठाया और कहा कि ये यह दिखाना चाह रहे हैं कि हिंदू भी मुसलमानों की तरह कट्टर हो सकते हैं. लेकिन इसका नतीजा क्या होगा और देश किधर जाएगा, वे यह नहीं समझ रहे हैं.
तसलीमा के इस लेख के सामने आने के बाद प्रतिक्रिया भी हो रही है. उन्हें लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं. उन्हें अहसान फरामोश तक कहा जा रहा है. सवाल उठाने वालों में बुद्धिजीवी भी हैं, जो कल तक उनके समर्थन में सबसे आगे रहते थे. वे तसलीमा नसरीन के भारत में शरण लेने का मुद्दा उछाल कर उनसे सवाल करते हैं कि वे हिंदुओं की तुलना आईएसआईएस से कैसे कर सकती हैं. उनका मानना है कि यह विचित्र है. इस्लामी देशों में तसलीमा नसरीन खुद को महफूज नहीं मान रहीं थीं. इसलिए उन्होंने भारत में शरण ले रखी है और अब यहां के हिंदू संगठनों की तुलना आईएसआईएस से कर रही हैं. यह दुखद है. जाहिर है कि ऐसा करते हुए उनकी सोच के साथ-साथ उनके लेखन पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. यह भी कम दिलचस्प नहीं है कि कल तक यही लोग तसलीमा के साथ खड़े थे क्योंकि तब वे मुसलिम कट्टरवाद पर हमले कर रहीं थीं. लेकिन आज जब वे दूसरी तरफ के कट्टरवाद पर बात कर रहीं हैं, तो वही लोग अब उनके लेखन पर सवाल उठा रहे हैं. टॉलरेंस और इनटॉरेंस पर बहस करने वालों के सामने भी अब संकट है. यह संकट उनकी सोच को लेकर है और सवाल मानसिकता पर.

News Posted on: 16-12-2017
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