पूर्वजन्म, पाप और भाजपा के मंत्री हेमंत विश्व सरमा

फ़ज़ल इमाम मल्लिक

हेमंत विस्व सरमा असम में कांग्रेस के कद्दावर नेता थे. विधानसभा चुनाव से पहले वे कांग्रेस छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी के साथ हो लिए. वजह बताई राहुल गांधी को. तब के मुख्यमंत्री तरुण गोगई से उनकी नहीं पटती थी. कद्दावर थे तो मुख्यमंत्री भी बनना चाहते थे. कांग्रेस ने नहीं सुनी. राहुल गांधी तक से मिलने जा पहुंचे थे. लेकिन राहुल ने उन्हें तवज्जो नहीं दी. तब छाती पीट-पीट कर कहा करते थे कि राहुल कांग्रेस को डुबो देंगे. कर्यकर्ताओं-नेताओं से मिलने की उन्हें फुर्सत नहीं. हेमंत राहुल के व्यवहार से बेतरह आहत थे. हेमंत विस्व सरमा को उन्होंने कोई नोटिस नहीं लिया. वे बैठे रहे और राहुल गांधी अपने कुत्ते को बिस्कुट खिलाते रहे. यह बात समाचार चैनलों पर सरमा ने ही बताई थी. सरमा को अपना यह अपमान पसंद नहीं आया. राहुल के व्यवहार को यहां वहां कोसने लगे और भाजपा के साथ होकर जी जान लगा कर कांग्रेस को असम की सत्ता से बाहर किया. उम्मीद लगाई थी कि भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री बना देगी. बड़े नेता ठहरे. लेकिन बड़े तो वे कांग्रेस में थे, भाजपा के लिए तो नए रंगरूट ही ठहरे. लिहाजा कांग्रेस की तरह भाजपा ने भी उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया, लेकिन स्वास्थ्य, वित्त और शिक्षा मंत्री बना कर उनके रुतबे को बनाए रखा.

अब इन्हीं हेमंत विस्व सरमा ने ऐसा बेतुका बोला है कि भाजपा सकते में है. सार्वजनिक सभा में सरमा बोले तो लगा कि वे प्रवचन दे रहे हैं. किसी साधू-महात्मा की तरह पाप-पूण्य का हिसाब लेने लगे. गुवाहाटी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पूर्वजन्म में किए पाप की वजह से कैंसर जैसी बीमारी और हादसे होते हैं. उन्होंने कैंसर को ईश्वरीय न्याय बताया और कहा कि अपने माता-पिता की गलतियों की सजा उसके संतान को भुगतनी पड़ती है. कोई भी इंसान खुदा के इंसाफ से बच नहीं सकता. यानी सरमा के कहे को अगर सही मान लें तो दुनिया की सारी बीमारियों की वजह पूर्वजन्म में किए गए पाप का ही नतीजा है और देश में जो कुछ भी घट रहा है उसकी वजह भी सरकारें नहीं पुराने जन्म के पाप हैं. सरमा के मुताबिक किस्मत ही सब कुछ है और उसके लिखे को कोई मिटा नहीं सकता. सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है. लोगों की मौतें भूख से होती हैं हों. किसान आत्महत्या कर रहे हैं, करें. कुपोषण की वजह से बच्चों की मौतें हो रही हैं, होने दें. बीमारी-गरीबी भूखमरी से लोग परेशान हैं, होते रहें. सरकार को इन सबसे कोई मतलब नहीं क्योंकि सब कुछ भाग्य में लिखा होता है और पहले से ही तय होता है.

सरमा ने जो कुछ भी कहा सभ्य समाज में तो इसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की होगी. कैंसर मरीजों को तो उन्होंने अपने इस कहे से आहत किया ही, विपक्ष भी आगबबूला है. विपक्ष ने कहा भी कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए ऐसा कर रही है. सरमा ने ऐसा बोल कर कैंसर के मरीजों का दिल दुखाया है. उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहीए. लेकिन हैरत यह कै सरमा के इस बिगड़े बोल पर मुख्यमंत्री सहित भाजपा के किसी बड़े नेता ने कुछ भी कहने की जहमत नहीं की है.

भाजपा नेताओं को कम से कम अपने मंत्री के बयान की निंदा तो करनी ही चाहिए थी. लेकिन किसी ने ऐसा नहीं किया. तकलीफ में डालने वाली बात यह है कि कैंसर जैसी बीमारी को लेकर एक मंत्री इतना असंवेदनशील कैसे हो सकते हैं. इस बीमारी से लोग रोज तिल-तिल कर मरते हैं और साल में चार लाख लोगों की मौत कैंसर से हो जाती है. इसके कारगर इलाज खोजने की बजाय एक स्वास्थय मंत्री अगर इस तरह का बयान देता है तो समझा जा सकता है कि सरकारें कितनी संवेदनहीन हो गई हैं.

News Posted on: 26-11-2017
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