ईरान-भारत के बीच रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा के लिए हुई ठोस बात,प्रेसिडेंट कोविंद और पी एम मोदी ने किया जमकर स्वागत राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि उनका देश भारत के साथ पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते होंगे मज़बूत.........

गुजरात तो याद रहा लेकिन मुजफ्फरनगर भूल गए ज़हरीले आजम खान

फ़ज़ल इमाम मल्लिक

उत्तर प्रदेश के कद्दावर समाजवादी नेता और पूर्व मंत्री आजम खान ने लंबी चुप्पी तोड़ दी है. लंबे समय से वे खामोश थे. राम मंदिर-बाबरी मस्जिद पर बहस चल रही थी और आजम खान सीन से ही गायब थे. यह बात हैरत में डालने वाली थी. आजम खान बेबाक बोलते हैं. जज्बात में गलत भी बोल जाते हैं. भारतीय जनता पार्टी उनके एजंडे पर सबसे ऊपर है. वे भाजपा पर हमला करने के किसे भी मौके को हाथ से जाने नहीं देते. रामपुर से वे लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं. उन पर आरोप भी लगते रहे हैं. लेकिन वे विचलित हुए बिना अपनी बात रखते हैं. अमर सिंह के मुद्दे पर एक बार वे समाजवादी पार्टी छोड़ भी चुके हैं. लेकिन मुलायम सिंह यादव से दोस्ती की वजह से उनकी सपा में वापसी हुई. वे मंत्री बने. अब सरकार नहीं है लेकिन तेवर ढीले नहीं हुए हैं. उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव होने हैं. कई शहरों के मेयर चुने जाने है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस चुनाव को लेकर बहुत गंभीर है. वे इसे अपनी हकूमत के लिए बड़ा इम्तहान मान रहे हैं. लेकिन इस चुनाव में विकास की बातें पीछे छूट गई हैं. वोटरों को ध्रुवीकरण की कोशिश योगी आदित्यनाथ भी कर रहे हैं और उनके पार्टी के नेता भी. बाबार और राम का सहारा लिया जा रहा है तो कहीं मतदाताओं को धमकाया जा रहा है. योगी आदित्यनाथ ने चुनाव अभियान की शुरुआत अयोध्या से ‘जय श्रीराम’ के नारे से की थी. बारी अब आजम खान की थी.

आजम खान की चुप्पी लंबे समय के बाद टूटी. वे बोले और जम कर बोले. मौसम चुनाव का है तो अपने वोटरों को लुभाने की ही उन्होंने कोशिश की. उन्होंने अयोध्या से योगी के चुनाव अभियान शुरू करने पर सवाल उठाया और पूछा स्थानीय निकाय के चुनाव भी अगर अयोध्या से शुरू होंगे तो इसका मतलब है आप घबराए हुए हैं. राम का इस्तेमाल चुनाव निशान के तौर पर किया जाएगा तो यह बहुत महंगा पड़ेगा. आजम खान ने कहा कि नफरत के एजंडे पर हकूमत तो बनाई जा सकती है लेकिन नफरत के एजंडे पर बहुत दिन तक हकूमत नहीं चलाई जा सकती.

आजम खान ने नरेंद्र मोदी को भी ललकारा. आजम का कहना है कि मुसलमान कसाई नहीं है. कसाई एक कारोबार है. नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए आजम कहते हैं कि मुसलमान कसाई नहीं है. हिंदुस्तान का पहला कसाई वह था जिसने महात्मा गांधी को मारा था, नाथूराम गोडसे. आजम ने गोरक्षा के नाम पर होने वाली हत्याओं का जिक्र भी किया. आजम ने कहा कि कसाई वह था जिसने फ्रिज से गोश्त निकाल कर किसी का कत्ल कर दिया. कसाई वह था जिसने ट्रेन से उतारकर ये पूछा था कि क्या खाया है , फिर उसे मार दिया था. कसाई वह नहीं था जो पाकिस्तान से जंग के दौरान टैंक के नीचे लेट गया जिसके चीथड़े उड़ गए थे वह कसाई नहीं था... वह अब्दुल हमीद था. आजम के मुताबिक सामुहिक किस्म का कोई कसाई था तो वह आपका सूबा गुजरात था. जहां बेगुनाहों को जलाया गया. मासूम बच्चों को मारा गया.

लेकिन इस संदर्भ में आजम खान ने मुजफ्फरनगर को कसाई नहीं कहा जहां सपा के शासनकाल में एक अलग तरह का गुजरात हुआ था. दंगे मोदी का राज में हों तो खराब और अखिलेश यादव के शासनकाल में हो तो सही. यह नहीं हो सकता आजम खान साहब. गुजरात के दंगों की याद करें और मुजफ्फरनगर पर चुप रहें तो यह सियासी बेईमानी कही जाएगी आजम खान साहब. क्योंकि मुजफ्फरनगर में भी मासूमों और मजलूमों पर जुल्म हुआ, इसे आप कैसे भूल गए. लेकिन सियासत में दूसरों की कमीज पर लगा दाग तो दिखता है अपनी कमीज पर लगा दाग नहीं दिखता. आजम खान के साथ भी कुछ ऐसा ही है. उन्हें गुजरात याद रहा लेकिन मुजफ्फरनगर, बरेली याद नहीं रहा.

आजम फिल्म पद्मावती के विवाद पर भी बोले. उन्होंने नवाबों, राजपूतों और राजघरानों की खिल्ली उड़ाई और कहा कि कहां कहां के राजा मुखालफत कर रहे हैं. हम तो चालीस साल से कह रहे हैं कि हिंदुस्तान के तमाम नवाब और तमाम राजा अंग्रेजों के एजंट थे. आज बड़ी-बड़ी पगड़ियां लगाकर ये एक फिल्म का विरोध कर रहे हैं. फिल्मों की मुखालफत नहीं की जाती है, मजे लिए जाते हैं. आज जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वे कल तक अंग्रेजों के बस्ते उठाया करते थे. अंग्रेजों के सम्मान में झुककर चालीस बार सलाम करते थे. उन्हें यह भूलना नहीं चाहिए कि अंग्रेज गए नवाबों की नवाबियत गई और राजाओं की राजशाही गई. आजम ने मुगले आजम फिल्म का उल्लेख करते हुए अनारकली को काल्पनिक चरित्र बता कर मुसलमानों के कसीदे पढ़े. लेकिन ऐसा करते हुए आजम कई तथ्यों को भूल गए. उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था. उन राजाओं और नवाबों को जरूर याद करना चाहिए था जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाइयां लड़ीं लेकिन उनके आगे सर नहीं झुकाया. पर आजम तो आजम ठहरे. योगी की तरह ही वे अपने वोटरों से बतियाते हैं. बातें सियासी होती हैं इतिहास से उसका मतलब नहीं क्योंकि इतिहास चुनाव नहीं जितवाता.

News Posted on: 22-11-2017
वीडियो न्यूज़