जरायम पेशा अनासिर बने अयोध्या मसले के ठेकेदार

 

हिसाम सिद्दीकी-एडिटर जदीद मरकज़ की स्पेशल रिपोर्ट

लखनऊ! सुन्नी सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा, आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड, विश्व हिन्दू परिषद और अयोध्या के जिम्मेदार साधु-संतों के साफ इंकार के बावजूद एनजीटी के जरिए पांच करोड़ के जुर्माने के मुल्जिम रविशंकर अपने जैसे कानून के मुजरिम कुछ मुसलमानों के साथ बाबरी मस्जिद राम जन्म भूमि का मसला हल कराने के ड्रामे में सरगर्म हैं। सभी फरीकैन का कहना है कि पांच दिसम्बर से सुप्रीम कोर्ट में इस मसले की रोजाना सुनवाई हो रही है। इसलिए अब वह लोग अदालत का ही फैसला तस्लीम करेंगे। अदालत से बाहर बातचीत के जरिए मसला हल किए जाने की कई कोशिशें पहले ही नाकाम हो चुकी हैं। इसलिए अब बातचीत का कोई जवाज (औचित्य) नहीं है। चूंकि भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर गुजरात का एलक्शन अयोध्या के सहारे लडने का प्रोग्राम बनाया तो देश का कानून न मानने वाले रविशंकर समेत कई ऐसे लोग सरगर्म हो गए जिनकी समाज और कानून की नजरों  में कोई वकअत और अहमियत नहीं है। अपने नाम के साथ कई बार श्री-श्री लिखने वाले रविशंकर एक अच्छे ताजिर हैं। आरएसएस और बीजेपी की बी-टीम की शक्ल में काम करते हैं। संत होने का ढोग करते हैं और एलक्शन में बीजेपी के लिए कम्पेन भी करते है। उन्होंने शुरू नवम्बर में ही बातचीत के जरिए अयोध्या मसले का हल निकालने का राग छेड़ दिया तो उन्हीं जैसे कई बेईमान और कानून को न मानने वाले उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के मुतनाजा (विवादित) चेयरमैन वसीम रिजवी जैसे लोग भी उनके साथ लग लिए। शिया वक्फ बोर्ड की जायदादें बेचने और बड़े पैमाने पर घपला करने वाले वसीम रिजवी की अपनी ही शिया बिरादरी में कोई इज्जत नहीं है। तकरीबन तमाम शिया उन्हें बेईमान कहते हैं लेकिन वह रविशंकर के साथ मिलकर अयोध्या मसला हल कराने निकल पड़े है। वसीम रिजवी ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद चूंकि मीर बाकी के जरिए बनाई गई थी जो शिया थे इसलिए उस जगह पर शिया फिरके और शिया वक्फ बोर्ड का ही हक (अधिकार) बनता है और वक्फ बोर्ड के चेयरमैन की हैसियत से वह इस हक को छोड़ रहे हैं। रविशंकर जबतक एनजीटी के जरिए लगाए गए जुर्माने की रकम अदा नहीं करते वह कानून की नजरों में मुजरिम हैं 
अपनी तमाम बेईमानियों के लिए सीबीआई तहकीकात और जेल जाने का खौफ वसीम रिजवी पर इस हद तक हावी है कि वह पागलों जैसी बाते करने लगा हैं। मसलन उसने यह तक कह दिया कि अयोध्या ही नहीं अयोध्या और फैजाबाद कहीं भी कोई मस्जिद नहीं बनाई जा सकती और मुल्क के किसी भी कोने में बनने वाली मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर नहीं रखा जा सकता। अयोध्या और फैजाबाद दोनों जगह कोई मस्जिद नहीं बन सकती यह बात तो आज तक विश्व हिन्दू परिषद और आरएसएस ने भी नहीं कही। लेकिन मोदी और योगी दरबार में दाखिले के लिए उतावले वसीम रिजवी ने यह बेहूदा बात भी कह दी। टीवी चैनलों में अपनी शक्ल दिखाने और अखबारात में नाम छपवाने के लिए उतावले रहने वाले मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के मेम्बर कमाल फारूकी भी बोर्ड की मर्जी के खिलाफ रविशंकर के गैंग में शामिल हो गए।

 

News Posted on: 20-11-2017
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