बीजेपी,मोदी,जेटली,को यशवंत सिन्हा ने कर रक्खा हैं आजिज़?

फ़ज़ल इमाम मल्लिक

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व नोटबंदी की वजह से भारतीय जनता पार्टी की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा भाजपा की परेशानी का सबब बन गए हैं. हालांकि सांसद शत्रुघन सिन्हा और सुब्रमणियम स्वामी भी इस मामले पर सरकार की खिंचाई करते रहे हैं लेकिन यशवंत सिन्हा ज्यादा मुखर हैं. वे शहर-शहर घूम रहे हैं और नोटबंदी व जीएसटी से चौपट हुई अर्थव्यवस्था पर बोल रहे हैं. पैराडाइज पेपर्स में बेटे जयंत सिन्हा का नाम आने पर वे उनके खिलाफ जांच की बात करते हैं लेकिन साथ ही यह भी कहते हैं कि अमित शाह के बेटे जय शाह के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए. घर के अंदर से लगातार उठ रही आवाज से भाजपा की परेशानी बढ़ी है.

गुजरात में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं. इसलिए यशवंत सिन्हा गुजरात पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. गुजरात में नोटबंदी और जीएसटी की मार कारोबारियों पर ज्यादा पड़ी है. कारोबारी सरकार से नाराज हैं और यशवंत सिन्हा भाजपा के खिलाफ पनपे माहौल को पार्टी के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश में लगे हैं. एक पखवाड़े में वे दूसरी बार गुजरात में थे और इस दौरान जीएसटी व नोटबंदी के सरकार के फैसले को लेकर व केंद्र की मोदी सरकार पर जम कर बरसे. सिन्हा ने कहा कि नोटबंदी और इसके प्रभाव की वजह से देश को करीब पौने चार लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच सौ व एक हजार रुपए के नोटों को बंद करने के फैसले की तुलना तुगलक वंश के राजा मोहम्मद बिन तुगलक से की.

सिन्हा लोकशाही बचाओ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे. सिन्हा के मुताबिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाते हैं कि कई बार राजाओं और सम्राटों ने नोटबंदी की. करीब सात सौ साल पहले इस देश में एक राजा हुआ करता था. उस राजा ने पुरानी मुद्रा बंद कर अपनी मुद्रा चलाई. नोटबंदी सात सौ साल पहले हुई थी. उस राजा का नाम था मोहम्मद बिन तुगलक. वह अपनी राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद ले गया और इसके लिए वह बदनाम भी रहा है. तुगलक ने सोने और चांदी के सिक्के को बंद कर पीतल और तांबे के सिक्के चलाए. अब दूसरी बार नोटबंदी की गई और इसे इतना महत्त्वपूर्ण बना डाला गया कि इसका एलान रिजर्व बैंक के गवर्नर या देश के वित्त मंत्री ने नहीं बल्कि खुद प्रधानमंत्री ने किया.

सिन्हा ने मोदी पर निशाना साधने में किसी तरह की कंजूसी नहीं की. उन्होंने कहा कि नोटबंदी जब फ्लाप हो गया तो आननफानन में प्रधानमंत्री कैशलेस की बात करने लगे. लेकिन सच तो यह है कि तब किसी के पास कैश नहीं था यानी देश पहले ही कैशलेस हो चुका था. सिन्हा के सवाल वाजिब भी लगते हैं और उनके सवालों का भाजपा नेताओं के पास जवाब नहीं है. वे प्रधानमंत्री की इस बात पर कि 18 लाख लेनदेन की जांच की जारही है पर तंज करते हैं और कहते हैं कि इससे दुनिया भर में भारत को लेकर गलत संदेश गया है. ऐसा माना जारहा है कि भारत चोरों का डेरा है और तमाम लोग गलत तरीके से पैसा कमा रहे हैं और कोई ईमानदार नहीं है.

सिन्हा ने जीएसटी पर भी सवाल खड़े किए और इसके लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा. अर्थव्यवस्था में मंदी की वजह वे जेटली को मानते हैं. सिन्हा साफ करते हैं कि इसके लिए जेटली से इस्तीफा मांगा जाना चाहिए. सिन्हा ने साफ किया की देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है और पुरानी परियोजनाएं अटकी पड़ी हैं और नई परियोजनाएं शुरू नहीं हो पाईं हैं. सरकार इस मोर्चे पर नाकाम रही है. सरकार ने चुनौतियों से निपटने के लिए कोई गंभीर कदम नहीं उठाए. सिन्हा के लगातार हमलों से भाजपा की परेशानी लगातार बढ़ी है. पार्टी ने अपने कुछ नेताओं को उनके पीछे जरूर लगाया है लेकिन सिन्हा हैं कि मानते ही नहीं.

News Posted on: 15-11-2017
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