छीछालेदर कराकर सत्ता खोने वाले अखिलेश और शिवपाल हुए मुलायम,सैफई में जमा होकर राम गोपाल के साथ खायी मिठाई........कोलकाता में 19 मंजिला इमारत में भीषण आग, लगातार फैल रही, फायर ब्रिगेड की 10 गाड़ियां मौके पर.........

E-Paper

आज़म खान के चमचे वसीम रिज़वी के बाबरी मस्जिद पर दावे से भड़का सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड किया निंदा

सस्ती लोकप्रियता,सरकार से अपनी सुरक्षा बढाने, भ्रष्टाचार के लगे आरोपों की जाँच को घूमा रहा हैं वक़्फ़ खोर वसीम रिज़वी -ज़फर फ़ारूक़ी

लखनऊ -सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड बाबरी मस्जिद मामलें में वसीम रिज़वी, अध्यक्ष, शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के 8 अगस्त को उच्चतम न्यायालय में दाखिल किया गए शपथ पत्र पर आज भड़क गया,चेयरमैन ज़फर फ़ारूक़ी ने २ पेज का कड़क बयान देते हुए कहा जो अपने प्रख्यात शिया धर्म गुरु का नहीं हुआ वो बाबरी मस्जिद का क्या होगा, सिर्फ सस्ती लोकप्रियता,सरकार से अपनी सुरक्षा बढाने,आरोपों की जाँच को गुमराह करने के लिए ऐसी खुराफात की हैं.और अफ़सोस तो इस बात बात का हैं की जिस हलफनामे का संज्ञान सर्वोच्च न्यायालय ने अभी तक नहीं लिया। मीडिया ने उसको लेकर ट्रायल शुरू कर दिया। 
ज़फर फ़ारूक़ी ने आगे कहा वसीम रिज़वी द्वारा शपथपत्र में उप्र सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड पर बेहद द्ववेशपूर्ण, अपमानजनक तथा आधारहीन आरोप लगाये गये हैं। जिसमें प्रमुख रूप से विन्दु संख्या-14 में यह है कि “उप्र सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड कट्टरपंथियों, उन्मादियों और शांतिपूर्ण समाज मे विश्वास न रखने वालों के नियंत्रण में हैं”। 
उप्र सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड लगाये गये ऐसे आधारहीन आरोपों की क्रडे शब्दों में निन्दा करता है और यह सवाल करता है कि वह स्वयं उप्र सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड की संरचना से भली - भाँति परिचित है इसलिए उन्हें तत्काल इंगित करना चाहिए कि सुन्नी बोर्ड मे कौन-कौन कट्टरपंथी, उन्मादी तथा शांतिपूर्ण समाज में अविश्वास रखने वाला है। 
स्पष्ट करना है कि बोर्ड का गठन दो सांसद, एक सदस्य विधान सभा, दो पूर्व अध्यक्ष तथा वर्तमान सदस्य उप्र राज्य बार काउंसिल, गोरखपुर शहर के एक सम्मानित मुतवल्ली, एक इस्लाम धर्म के विद्वान, एक प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, एक आईएएस अधिकारी तथा अधोहस्ताक्षरी से मिलकर हुआ है। 
श्री रिजवी को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उपरोक्त बोर्ड सदस्यों में से कौन सदस्य कट्टरपंथी, उन्मादी तथा अशांति फैलाने वाले हैं।

ज़फर फ़ारूक़ी ने ये भी कहा कि वसीम रिजवी को ऐसे आधारहीन आरोप लगाने कि आदत है। इनके द्वारा कुछ समय पहले भी अपने शिया समुदाय के प्रख्यात एवं वरिष्ठ धर्मगुरू पर अनर्गल आरोप लगाये थें। जिसके फलस्वरूप थाना हज़रतगंज, लखनऊ मे वसीम के विरूद्ध एफआईआर भी दर्ज हुई थी।
वसीम पिछले 13 वर्षो से शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के सदस्य हैं जिसमें से 10 वर्षो से बोर्ड के अध्यक्ष भी है। इन्होने उच्च न्यायालय में 2010 तक और इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या विवाद से सम्बंधित कोई हस्तक्षेप लिखित अथवा मौेखिक रूप से कभी नही किया गया।
अब इस मौके पर उनका हस्तक्षेप केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और सरकार द्वारा अपनी सुरक्षा बढाने का प्रयास तथा उनपर लगे आरोपों की जाँच को गुमराह करना मात्र है। शिया वक़्फ़ बोर्ड के उठाये गये कानूनी तथा वास्तविक मुद्दो का उत्तर सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्तागण मा सर्वोच्च न्यायालय में देगें।
ज़फर फ़ारूक़ी ने ये भी कहा की वसीम रिज़वी अपने को शिया समुदाय का प्रतिनिधि होने का दावा करतें है जबकि सच्चाई यह है कि न केवल प्रख्यात एवं वरिष्ठ धर्मगुरू बल्कि शिया समुदाय की महिलाओें एवं बच्चों द्वारा भी सडको एवं गलियों पर प्रदर्शन कर इन पर भ्रष्टाचार के लगे आरोपों पर कार्यवाही करने की माँग विगत कई वर्षों से की जा रही है।
जहाँ तक अयोध्या विवाद का एक सौहार्दपूर्ण और बातचीत से समझौते का सम्बंध है, बोर्ड कभी भी किसी भी बातचीत से पीछे नही हटा लेकिन कोई भी बातचीत और कोई भी सम्मानजनक तथा सौहार्दपूर्ण समझौता केवल मूल पक्षों के बीच केन्द्र सरकार की सक्रीय भागीदारी के साथ ही होना चाहिए।

News Posted on: 10-08-2017
वीडियो न्यूज़