और बिक गया आज़म खान,चमचे चेयरमैन वसीम रिज़वी के ज़रिये शिया वक्‍फ बोर्ड से दाखिल करवाया सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा,बाबरी मस्जिद की ज&

और बिक गया आज़म खान,चमचे चेयरमैन वसीम रिज़वी के ज़रिये  शिया वक्‍फ बोर्ड से दाखिल करवाया  सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा,बाबरी मस्जिद की जमीन के एक तिहाई हिस्‍से पर जताया हक

तहलका टुडे टीम 

दिल्‍ली:वक़्फ़ों की सैकड़ो अरब  की ज़मीन खुर्द बुर्द करवाने पर सीबीआई जांच में फंसे  पूर्व मंत्री आज़म खान ने नयी चाल अब चली हैं ऐसी खबरे आ रही हैं की विश्व हिन्दू परिषद से बाबरी मस्जिद का सौदा कर लिया गया हैं? इसी के तहत आज़म खान ने अपने चमचे वक़्फ़ खोर शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी से रामजन्मभूमि बाबरी विवाद केस में  सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल  कर कहा है कि 2010 में आये इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसले के मुताबिक जमीन के एक तिहाई हिस्से पर हक़ उनका है ना कि सुन्नी वफ्फ बोर्ड का.
उनके मुताबिक ये मस्जिद मीर बांकी ने बनाई थी, जो कि एक शिया था. शिया वफ्फ बोर्ड के मुताबिक वो विवादित जगह पर भी दावा छोड़ सकते है,अगर सरकार उन्हें दूसरी जगह ऐसी ही मस्जिद बनाने की जगह दे दे. विवादित जमीन से थोड़ी दूर मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद बनाई जा सकती है. शिया वक़्फ़ बोर्ड ने कहा कि विवादित जमीन पर मंदिर -मस्जिद दोनों बनाये जाने पर रोज झगड़े होंगे.
मालूम हो शिया वक़्फ़ बोर्ड के घोटाले और वक़्फ़ खोरो द्वारा बर्बाद करने को लेकर हुई शिकायत के बाद सीएम योगी सरकार एक्टिव हो गयी थी जिसके तहत आज़म खान और शिया सेंट्रल बोर्ड  के चेयरमैन वसीम रिज़वी के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की गयी थी जिससे इनकी नींद हराम हो गयी थी । जांच से बचने के लिए आज़म खान ने चमचे वसीम से मिलकर नयी चाल चली सुप्रीम कोर्ट में हलफ नामा दाखिल कर दावेदारी कर नया मुद्दा खड़ा कर सरकार से जांच को ढीला करने काम अंजाम दिया हैं  ,आज़म खान पहले बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के प्रवक्ता भी रहे हैं,और खूब मुसलमानो को भड़काते और ज़हर उगलते थे. 
शिया वक़्फ़ बोर्ड के सैकड़ो वक़्फ़ पर आज भी सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का कब्ज़ा हैं इस पर आज तक कोई दावेदारी क्यों नहीं की गयी। ये भी सवाल उठ रहे हैं अवाम के बीच से। 

शिया बनाम सुन्‍नी

आज़म खान ने एक चाल और चली हैं जिससे शिया सुन्निओं में इसको लेकर इख़्तेलाफ़ हो इसके तहत  शिया वक़्फ़ बोर्ड ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड शांति पूर्ण तरीके से समाधान नहीं चाहता. इस मसले को सभी पक्ष आपस में बैठकर सुलझा सकते हैं और सुप्रीम कोर्ट इसमें उन्हें वक्त दे. इसके लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाए जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुआई में हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत जज, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी के अलावा और पक्षकार शामिल हों.

शिया वक़फ  बोर्ड इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी पक्षकार था, हालांकि हाई कोर्ट में विस्तृत दलील के लिए पैरवी नही की. 2011 में जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा  तो सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था. ये हलफनामा उसी नोटिस के जवाब में आया है.

हाई कोर्ट का फैसला

दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2010 में जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षकारों में बांटने का आदेश दिया था. हाई कोर्ट ने जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था. हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में अपीलें दाखिल कर रखी हैं जो कि पिछले छह साल से लंबित हैं. इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी.
News Posted on: 08-08-2017
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