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मोदी से आजिज़ मायावती का राज्यसभा से इस्तीफा, बोलने को 3 ही मिनट मिलने से थीं नाराज

 

नई दिल्ली. मायावती ने मंगलवार को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। वे राज्यसभा में अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पाने से नाराज थीं। उन्होंने कहा था- ''अगर मैं सदन में दलितों के हितों की बात नहीं उठा सकती तो मेरे राज्यसभा में रहने पर लानत है। मैं अपने समाज की रक्षा नहीं कर पा रही हूं। अगर मुझे अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है तो मुझे सदन में रहने का अधिकार नहीं है। मैं सदन की सदस्यता से आज ही इस्तीफा दे रही हूं।'’ इसके बाद मायावती राज्यसभा से बाहर चली गईं। उनके सपोर्ट में कांग्रेस और तृणमूल सांसदों ने भी वॉकआउट कर दिया। दरअसल, मायावती को तीन मिनट का वक्त मिला था। उन्होंने सात मिनट लिए। इसके बाद उनकी उपसभापति से बहस हुई। बता दें कि उनका टेन्योर अगले साल खत्म हो रहा था। किस मुद्दे पर बोल रही थीं मायावती...
- देशभर में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्याएं होने के मुद्दे पर राज्यसभा में नियम 267 के तहत चर्चा शुरू हुई। 
- मायावती ने कहा कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से भीड़ द्वारा हत्याएं करने की घटनाएं बढ़ रही हैं। अल्पसंख्यकों, पिछड़े, दलितों, किसानों और मजदूरों का दमन किया जा रहा है। भाजपा शासित राज्यों में भीड़ द्वारा हत्या के मामलों में इजाफा हो रहा है।
सहारनपुर का मुद्दा उठाते ही हुआ हंगामा
- मायावती ने कहा कि सहारनपुर में हिंसा को जातीय हिंसा का नाम दिया गया है, जबकि यह दलितोें को डराने-धमकाने की कार्रवाई थी। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने शोरगुल शुरू कर दिया। 
- संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सहारनपुर मामले की जांच चल रही है। लेकिन मायावती दलितों के नाम पर राजनीति कर रही हैं।
तीन मिनट का वक्त पूरा हुआ
- उपसभापति पीजे कुरियन ने कहा कि हर वक्ता के लिए तीन मिनट तय किए गए हैं। उन्होेंने मायावती से अपनी बात खत्म करने को कहा। 
- जब वे लगातार बोलती रहीं तो कुरियन ने उन्हें बार-बार बैठने को कहा। इस पर मायावती ने कहा, "मुझे बोलने की अनुमति नहीं दी जाती है तो मैं आज ही इस्तीफा दे रही हूं।"
कुरियन से हुई बहस
- मायावती का कहना था कि यह शून्यकाल नहीं है कि केवल तीन मिनट दिए जाएं। अपनी बात कहने के लिए ज्यादा समय दिया जाना चाहिए था। 
- इस पर कुरियन ने कहा कि मायावती को बोलते हुए सात मिनट हो गए हैं। इसके बाद मायावती ने कहा कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है तो सदन में रहने का कोई मतलब नहीं है। वह सदन से इस्तीफा दे रही हैं। वे सदन से बाहर चली गईं। 
- इसके बाद कुरियन ने चर्चा के लिए विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद का नाम पुकारा। आजाद ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षों को अपनी बात कहने का मौका देने का भरोसा दिया था। विपक्ष देश हित में सरकार का सहयोग करने के लिए तैयार है लेकिन इस माहौल में काम नहीं हो सकता। इसलिए वे सदन से वॉकआउट कर रहे हैं। इसके बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य भी सदन से बाहर चले गए। 
- बीएसपी के सतीशचंद्र मिश्रा मायावती के साथ राज्यसभा से बाहर गए लेकिन जल्दी ही वापस लाैटे। इसके बाद बसपा के सदस्यों ने ‘दलितों की हत्याएं बंद करो' के नारे लगाए। समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने भी उनका साथ दिया।
इस्तीफा दिया तो मायावती की वापसी की राह आसान नहीं
- अगले साल अप्रैल में राज्यसभा की 10 सीटें खाली होंगी। इनमें से एक सीट मायावती की भी है। लेकिन इस साल के विधानसभा चुनाव में बसपा को 403 सीटों में से सिर्फ 19 सीटों पर जीत मिली थी। लिहाजा, अगले साल बसपा के पास इतने आंकड़े नहीं होंगे कि वह मायावती को आसानी से राज्यसभा में भेज सके।
लोकसभा में भी हंगामा हुआ
- उधर, लोकसभा में भी हंगामा हुआ। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी और लेफ्ट के सांसदों ने प्रश्नकाल के दौरान कई मुद्दों पर नारेबाजी की।
- सांसदों के हाथों में तख्तियां थीं। उन पर लिखा था- ‘गौमाता तो बहाना है, कर्ज माफी से ध्यान हटाना है’। एक और तख्ती पर लिखा था- विजय माल्या को देश छोड़ने की इजाजत किसने दी?'
- लोकसभा में हंगामा नहीं थमा। इसके बाद स्पीकर ने कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया।
अपोजिशन की 5 मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी
- विपक्ष की 5 अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी है। इसके लिए 18 विपक्षी दलों ने रणनीति तैयार की है।
- विपक्ष ने जिन 5 मुद्दों पर सरकार पर सवाल खड़े करने की तैयारी की है, उनमें नोटबंदी का लोगों पर बुरा असर, जीएसटी लागू करने में जल्दबाजी, किसानों की आत्महत्या, राजनीतिक साजिश, देश के संघीय ढांचे को बचाना और फेक न्यूज फैलाकर लोगों को भड़काना शामिल है।
- 11 जुलाई को हुई अपोजिशन पार्टियों की मीटिंग में सोनिया-राहुल गांधी, तृणमूल नेता डेरेक ओ'ब्रायन, जेडीयू के शरद यादव, एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल, सीपीएम के सीताराम येचुरी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, सपा नेता नरेश अग्रवाल, बीएसपी के सतीश मिश्रा और 10 अन्य पार्टियों के नेता शामिल हुए थे।
- डेरेक ने कहा, "पार्टियां इंडीविजुअली भी मुद्दों को उठाएंगी लेकिन कुछ मामलों पर 18 पार्टियां एकसाथ सरकार को घेरेंगी। हम (18 पार्टियां) एक टीम की तरह काम कर रहे हैं। इसमें किसी एक नेता के प्रमुख होने का सवाल ही नहीं उठता।"
- विपक्ष का आरोप है, "सरकार राजनीतिक साजिश कर रही है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को नारदा स्कैम में फंसाया गया। वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और उनके परिवार, लालू प्रसाद यादव के ठिकानों पर छापेमारी की गई।"
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News Posted on: 18-07-2017
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