UP असेंबली में विस्फोटक से हड़कंप, योगी ने बुलाई मीटिंग

लखनऊ.यूपी असेंबली में PETN नाम का एक्सप्लोसिव मिला है। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने सिक्युरिटी को लेकर एक हाईलेवल मीटिंग बुलाई है। गुरुवार को सेशन के दौरान सिक्युरिटी मेंबर्स को संदिग्ध व्हाइट पाउडर मिला था। जिसके बाद डॉग स्क्वॉड ने पूरी असेंबली की छानबीन की थी। इस पाउडर को फॉरेंसिक लैब भेजा गया, जहां इसके एक्सप्लोसिव होने की पुष्टि हुई। इस पाउडर का वजन 60 ग्राम था। अपोजिशन लीडर की सीट के पास मिला था पाउडर...

सोर्सेस के मुताबिक, "संदिग्ध पाउडर अपोजिशन लीडर रामगोव‍िंद चौधरी की सीट के पास म‍िला। ये नीले रंग की पॉलिथीन में था। सिक्युरिटी से जुड़े लोगों को सबसे पहले इस पाउडर का पता चला। इसके बाद उन्होंने सीएम को इसकी जानकारी दी।"
सीएम ने गुरुवार शाम 4 बजे डीजीपी, प्रिंस‍िपल सेक्रेटरी, असेंबली सेक्रेटरी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर सह‍ित कई सीन‍ियर अफसरों की मीट‍िंग बुलाई थी।
न्यूज एजेंसी के मुताबिक योगी ने शुक्रवार को भी इसी सिलसिले में एक हाईलेवल मीटिंग बुलाई है।
डीजीपी कर रहे हैं मॉनीटिरिंग
विधानसभा एसपी राहुल मिठास ने बताया, "60 ग्राम का सफेद पाउडर मिला था। इसे जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया। वहां से इसके PETN विस्फोटक होने की पुष्ट‍ि हुई है। पाउडर अंदर कैसे आया, इसकी जांच की जा रही है।'
एडीजी इंटेलिजेंस भावेश कुमार ने कहा कि पूरे मामले की मॉनिटरिंग डीजीपी खुद कर रहे हैं।
लापरवाही भी सामने आई
सोर्सेस के मुताबिक, "संदिग्ध पाउडर के बारे में गुरुवार को दोपहर को जानकारी मिली। लेकिन, इसके बावजूद अफसर तुरंत एक्शन लेने की बजाय सेक्रेटेरिएट खाली होने का इंतजार करते रहे। असेंबली और सेक्रेटेरिएट के ज्यादातर अधिकारी-कर्मचारियों के जाने के बाद इन्वेस्टिगेशन टीम्स को बुलाया गया।"
क्या होता है PETN?
पेंटाएरीथ्रीटोल ट्राइनाइट्रेट यानी PETN बेहद पावरफुल प्लास्टिक एक्सप्लोसिव है। ये व्हाइट पाउडर चरमपंथियों, आतंकियों के बीच पॉप्युलर है, क्योंकि ये ब्लैक मार्केट में आसानी से मिलता है और चेक प्वाइंट्स पर इसकी जांच बेहद मुश्किल है।
भारत में कहां हुआ PETN का इस्तेमाल?
7 सितंबर 2011 को दिल्ली हाईकोर्ट में हुए ब्लास्ट में PETN का इस्तेमाल किया गया था। इस ब्लास्ट में 17 लोग मारे गए थे और 76 लोग घायल हुए थे। इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि ब्लास्ट में PETN की काफी कम मात्रा इस्तेमाल की गई थी, लेकिन उसने काफी बड़ा नुकसान किया।
PETN की जांच मुश्किल क्यों?
दिल्ली HC ब्लास्ट के बाद तब इंटरनल सिक्युरिटी सेक्रेटरी रहे यूके बंसल ने बताया कि मौके से PETN होने के सबूत िमले। 
बंसल ने बताया कि लो मॉलीक्यूल्स होने के चलते ये मेटल डिटेक्टर में पकड़ में नहीं आता और स्निफर डॉग भी कई बार इसे नहीं पकड़ पाते हैं।
क्यों खतरनाक है PETN?
Experts के मुताबिक सिक्युरिटी इक्विपमेंट्स की पकड़ में ना आने की वजह से PETN आतंकवादियों की पसंद है। इसकी केवल 100 ग्राम मात्रा ही एक कार को ब्लास्ट करने के लिए काफी है।
कब-कब हुआ इस्तेमाल?
2001: शू बॉम्बर के नाम से मशहूर टेररिस्ट रिचर्ड रीड ने मियामी से जाने वाले अमेरिकन एयरलाइंस जेट पर इसका इस्तेमाल किया था। 
2009: अलकायदा मेंबर उमर फारुख अब्दुलमुतल्लब ने नॉर्थवेस्ट जाने वाली एक फ्लाइट में PETN के इस्तेमाल की कोशिश की,लेकिन नाकामयाब रहा। वो अपने अंडरवियर में एक्सप्लोसिव छिपाकर ले गया था और पकड़ा गया। 
2010: इस साल अक्टूबर महीने में यमन से अमेरिका जाने वाले एक कार्गो प्लेन में PETN मिला था।
2011: दिल्ली हाईकोर्ट में ब्लास्ट किया गया।

 

News Posted on: 14-07-2017
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