वाह रे कश्मीरी लानत पीटे मुसलमान शबे क़द्र २७ रमजान को मस्जिद के बाहर मुस्लिम DSP को पीट-पीटकर मार डाला,मोदी और उनकी महबूबा तुम यज़ीदी मुसलमानो माफ़ कर दे,लेकिन अल्लाह नहीं माफ़  करेगा क़ातिलों तुमको.......


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हजरत इमाम अली का शुभ जन्म दिवस पर अकीदत का उमड़ा सैलाब

बाराबंकी। हजरत इमाम अली अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिवस-13 रजब अकीदत एहतेराम  मनाई गयी जिले में जगह  जगह नजरो नियाज के साथ महफिल का आयोजन किया गया। कर्बला सिविल लाइन्स में वृक्षा रोपड़ के साथ सैयद शुजाअत हुसैन रिजवी नगरामी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा शरबत की सबील का आयोजन किया गया। आज सुबह ही पुलिस कप्तान वैभव कृष्ण आईपीएस शफीक अहमद और एडिशनल एसपी कुवंर ज्ञानंजय सिंह, सीओ संतोष सिंह के साथ कर्बला सिविल लाइन्स पहुंचे, यहाँ सबने मिलकर वृछा रोपड़ किया। वही दूसरी तरफ हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी १३ रजब के मौके पर कर्बला  पहुंचे पूर्व मंत्री अरविन्द सिंह गोप और सहकारी बैंक के चेयरमैन धीरेन्द्र वर्मा, हशमत अली गुड्डू ने सबको मुबारकबाद देने बाद वृक्षा रोपड़ किया। कर्बला सिविल लाइन्स में आयोजित महफिल को इमामे जुमा मौलाना मोहम्मद रजा जैदपुरी ने खिताब करते हुए कहा की पैगम्बरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के चचेरे भाई, दामाद और उत्तराधिकारी हजरत अली अलैहिस्सलाम के ज्ञान के बारे में बात करना किसी जबान और कलम के लिए संभव नहीं है। वे वही हैं जिनके बारे में पैगम्बरे इस्लाम ने कहा है ईश्वर ने अली को इतना ज्ञान व बुद्धि प्रदान की है कि अगर उसे धरती के समस्त लोगों में बांटा जाए तो वह सभी अपने दामन में ले लेगी और सभी लोग बुद्धिमान और ज्ञानी हो जाएंगे। मौलाना रजा ने आगे कहा हजरत अली अलैहिस्सलाम ने काबे में जन्म लिया और आंखें खोलीं, सभी आश्चर्यचकित रह गए क्योंकि तब तक किसी ने भी काबे में जन्म नहीं लिया था और उसके बाद से आज तक भी ऐसा नहीं हुआ है और यह उस बच्चे की महानता का एक चिन्ह था। आज हम एक ऐसे सपूर्ण मनुष्य का शुभ जन्म दिन मना रहे हैं जिसे उसके ईश्वर और पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के अलावा किसी ने भी सही तरीके से नहीं पहचाना। पैगम्बरे इस्लाम ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा थाः हे अली! ईश्वर को मेरे और तुम्हारे अलावा किसी ने भी नहीं पहचाना, मुझे ईश्वर और तुम्हारे सिवा किसी ने नहीं पहचाना और तुम्हें ईश्वर और मेरे अलावा किसी ने भी नहीं पहचाना लेकिन इसके बावजूद अली, इतिहास के पन्नों में सूरज की तरह चमक रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि खुद हजरत अली अलैहिस्सलाम से बेहतर कोई भी उनका परिचय नहीं करा सकता। नहजुल बलागा के 175वें भाषण में उन्हें ईश्वर द्वारा प्रदान किए गए ज्ञान के एक भाग की ओर संकेत किया गया है। वे कहते हैं। ईश्वर की सौगंध! अगर मैं चाहूं तो तुममें से हर एक को उसके जीवन के आरम्भ और अंत और जिंदगी के सभी मामलों के बारे में अवगत करा सकता हूं लेकिन इस बात से डरता हूं कि इस तरह की बातों के कारण तुम लोग पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का इन्कार न कर बैठो। जान लो कि मैं इन मूल्यवान राजों को अपने विश्वस्त दोस्तों के हवाले करूगंा। उस ईश्वर की सौगंध! जिसने मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम) को सत्य के साथ पैगम्बर बना कर भेजा, मैं सत्य के अलावा कुछ नहीं कहता। पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम इस संबंध में कहते हैं। हे अली! तुम (दुनिया के त्याग और ईश्वर की उपासना की दृष्टि से) मरयम के पुत्र ईसा जैसे हो अगर मुझे इस बात का भय न होता कि मेरी जाति का एक गुट तुम्हारे बारे में अतिशयोक्ति से काम लेगा और वही कहेगा जो ईसा के बारे में कहा गया, तो मैं तुम्हारे बारे में ऐसी बात कहता कि तुम जब भी लोगों के पास से गुजरते तो वे तुम्हारे पैरों के नीचे की मिट्टी को उठा कर चूमते। पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम से ज्ञान अर्जित करने के हजरत अली अलैहिस्सलाम के प्रयास, अथक व निरंतर थे और पैगम्बर के जीवन के अंतिम क्षण तक जारी रहे और हजरत अली उनके ज्ञान के अथाह सागर से तृप्त होते रहे। अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस का कहना है कि जब पैगम्बरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम अपने जीवन के अंतिम दिनों में थे तो उन्होंने हजरत अली को बुलाया और जब वे आ गए तो उन्हें अपना कपड़ा ओढ़ाया और उनकी ओर झुक कर कुछ कहा। जब हजरत अली बाहर निकले तो किसी ने उनसे पूछा कि पैगम्बर ने आपसे क्या कहा? उन्होंने जवाब दिया पैगम्बर ने मुझे ज्ञान के एक हजार दरवाजे सिखाए जिनमें से हर दरवाजे से हजार दरवाजे खुलते हैं। महफिल से पूर्व सरवर अली रिज़वी ने पढ़ा-आज काबे का कैसा मंज़र है, समा भी किस कदर मुनव्वर है। रास्ता जो भी है मुअत्तर है, बागे निकहत हर एक गुलेतर है। जो है मोमिन वह सुर्ख पैकर है, आने वाला जो पहला रहबर है, नाम उसका सुनो जी हैदर है। साकिया भर दे मेरा पैमाना रहे आबाद तेरा मैखाना, बस यही है सदाएं रिन्दाना, मैं भी हॅू आप ही का दीवाना। तेरी चैखट है और सरवर है आने वाला जो पहला रहबर है, नाम उसका सुनो जी हैदर है। राकीब, समद, राजा मेहदी, हैदर ने भी कलाम पेश किया। इस मौके पर अंत में कर्बला के खादिम रिजवान मुस्तफा और रेहान मुस्तफा ने सभी का शुक्रिया  किया।

News Posted on: 11-04-2017
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