ईरान-भारत के बीच रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा के लिए हुई ठोस बात,प्रेसिडेंट कोविंद और पी एम मोदी ने किया जमकर स्वागत राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि उनका देश भारत के साथ पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते होंगे मज़बूत.........

कुदरत की क़ुरबत का एहसास दिलाती अहमदाबाद की जामा मस्जिद

अहमदाबाद-   ईश्वर का एक नाम अहमद भी हैं।अहमदाबाद नाम से बसे इस शहर की आलीशान जामा मस्जिद  जहाँ  पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अबुल कलाम भी सजदा कर चुके हैं।वहा तहलका टुडे के एडिटर रिज़वान मुस्तफ़ा 12 फरवरी  को मग़रिब की नमाज़ के बाद देर रात अपने अज़ीज़ दोस्त हाइकोर्ट के सिनियर वकील अनवर शेख के साथ पहुचे मस्जिद आगे से बंद थी और उत्तर का छोटा दरवाज़ा खुला था।

अंदर जाकर रिज़वान मुस्तफ़ा ने इस आलीशान मस्जिद के सन्नाटे में नमाज़ की अदायगी की,एक कुदरत की क़ुरबत का एहसास में आंखों से निकले आँसूओ ने यहाँ की अज़मत और बुलंदियों को बता दिया।

जामा मस्जिद को 1423 में सुल्‍तान अहमद शाह प्रथम के शासनकाल के दौरान बनवाया गया था। इसका उ&

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दरगाह-ए-आलिया नजफ़-ए हिन्द जोगीपुरा की सालाना मजलिसे इस साल 10,11,12 व 13 मई को होंगी

नजीबाबाद। विश्व प्रसिद्ध दरगाहे आलिया नजफ ए हिंद जोगीपुरा पर हर साल की तरह इस साल भी आयोजित होने वाली चार दिवसीय सालाना मजालिस की तिथि घोषित कर दी गई है। चार दिवसीय सालाना मजालिस की तिथी और तैय्यारियों को लेकर दरगाह-ए आलिया नजफ़-ए हिन्द कमेटी की एक मीटिंग हुइ जिसकी अध्यक्षता रियाज़ जैदी ने और संचालन कलीम असगर ने किया। इस वर्ष दरगाह पर चार दिवसीय सालाना मजलिस ए 10 से 13 मई 2018 तक होंगी। जोगीरमपुरी में दरगाहे आलिया नजफ-ए हिंद पर आयोजित बैठक में इस वर्ष होने वाली चार दिवसीय मजलिसों की तैयारियों पर चर्चा की गई। सालाना मजलिसों की तिथि 10,11, 12 व 13 मई 2018 निर्धारित की गई। दरगाह-ए आलिया नजफ़-ए हिन्द कमेटी के सचिव विसाल मे

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ज़िंदाबाद देवबंद,नया साल का जश्न और जन्म दिन पर केक काटने पर पाबंदी लगाकर पश्चिमी सभ्यता के मुहं पर लगाया तमाचा

सहारनपुर. देवबंद के धर्मगुरुओं द्वारा एक फ़तवा जारी देश की सांस्कृति को बचाने के साथ पश्चिमी सभ्यता के मुहं पर तमाचा लगाया हैं, देवबंद ने नए साल का जश्न 1 जनवरी को नहीं मानाने का फरमान जारी किया है। मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है- "नए साल की जश्न मनाना इस्लाम में जायज नहीं है इसके साथ ही कहा गया है कि जन्म दिन  मनाना  और केक काटना भी इस्लाम में जायज नहीं है।
उन्होंने कहा कि- "इस्लाम में एक जनवरी पर नए साल की मुबारकबाद देना या फिर जश्न मनाना जायज नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इस्लाम में जन्मदिन मनाना या केक काटना भी नाजायज बताया गया है।
इस्लाम

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पैग़म्बर स.अ. और आपका साधारण जीवन,शुभ जन्म दिन पर विशेष

पैग़म्बर स.अ. जिनको अल्लाह ने सभी मुसलमानों के लिए आइडियल बना कर भेजा है, और हम सब की ज़िम्मेदारी है कि पैग़म्बर की सीरत और उनके जीवन को आइडियल बनाते हुए उस पर अमल करें ताकि हमारा जीवन कामयाब हो सके। हम इस लेख में पैग़म्बर स.अ. के साधारण जीवन की कुछ मिसालों को शिया और सुन्नी किताबों से पेश कर रहे हैं ताकि सभी मुसलमान पैग़म्बर स.अ. की रोज़ाना की ज़िंदगी को देखते हुए अपनी ज़िंदगी को उसी तरह बना सकें। 
सबसे पहले इस्लाम में साधारण जीवन किसे कहते हैं, इसको समझना होगा, इस्लाम की निगाह में साधारण जीवन और सादा ज़िंदगी का मतलब है, दुनिया की चमक धमक से मोहित हो कर उसके पीछे न भागे, और दुनिया, दौलत और दुनिया के पदों क

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शियों के नाम इमाम जाफ़र सादिक़ अ. की वसीयतें।

हठधर्मी से बचो, क्योंकि यह अमल को नष्ट कर देता है, और झगड़ालू व्यवहार के कारण जीवन बर्बाद मत करो क्योंकि अल्लाह से दूर कर देता है, पहले के लोगों के जीवन को देखो वह किस प्रकार चुपचाप जीवन बिताने का प्रयास करते थे
 
इमाम जाफर सादिक़ अ.स. ने अपने शिष्यो द्बारा अपने शियों को कुछ वसीयतें फरमाई , जिन मे से कुछ निम्नलिखित हैं । 
1.ज़ैद इब्ने शह्हाम का बयान है कि मुझ से इमाम सादिक़ अ.स. ने फ़रमाया, तुम्हारी निगाह में जो भी मेरी पैरवी करने वाला और मेरे बारे में बातें करने वाला है उसको मेरा सलाम कहना, मैं तुम सभी को तक़वा और परहेज़गारी अपनाने, अल्लाह के लिए काम करने, सच बोलने, अमानतदारी को बाक़ी रखने, अधिक

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इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत पर आइये इमामे ज़माना को पुरसा दिया जाए। उनकी हालाते ज़िन्दगी पर रिज़वान मुस्तफ़ा की रिपोर्ट

 

8वे इमाम हज़रत इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत पर आज हम सब गमज़दा हैं इसलिए कि इस दुनिया में आये अज़ीमुश्शान इमाम को जिसने इंसानियत ,सच्चाई,हक़ पसंदी,शांति और भाई चारे के लिए अपने को वक़्फ़ कर दिया।उस नेक इमाम को भी आज 23 ज़ीकाद को ज़हर देकर शहीद कर दिया गया ।आइये इमामे ज़माना को पुरसा दीजिये। हम उनकी ज़िंदगी के कुछ पहलूओं को आपकी खिदमत में पेश कर रहे ì

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गुप्त कलासेज में बच्चों को बनाया जा रहा हैं नाफरमान,वाल्दैन हो जाये होशियार : मौलाना कल्बे जवाद

शहर में आयोजित हो रहे गुप्त कलासेज मेंअपने बच्चों को शरीक होने से बचाएं : मौलाना कलबे जवाद
मौलाना ने शहर में आयोजित रहे गुप्त कलासेज की वास्तविकता को उजागर किया, साथ ही शिया वक्फ बोर्ड के हलफनामे की भी आलोचना की
लखनऊ 11 अगस्त : मुंबई और दूसरे शहरों की तर्ज पर लखनऊ में भी गुप्त कलासेज शुरू करने पर कडा रुख व्यक्त करते हुए मौलाना सैयद कलबे जवाद न&

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हज जैसी इबादत को कमाई का जरिया बनाये हैं सऊदी अरब ?

मक्का -दुनिया भर से लाखों मुसलमान हर बरस हज करने सऊदी अरब आते हैं. हज के वक्त सऊदी अरब में आर्थिक गतिविधियां भी ख़ासी तेज हो जाती हैं.
कई लोगों के जेहन में ये सवाल आता है कि हज और अल-उमरा जाने वाले मुसलमानों से सऊदी अरब को कितनी आमदनी होती है.
सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में इस आमदनी का कितना हिस्सा है.
इस आंकड़ें तक पहुंचने के लिए सबसे पहले तो हज

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शिया धर्म गुरु आफ़ताबे शरीयत मौलाना कल्बे जवाद को टाइफाइड,तबियत सीरियस,दुआ की अपील

लखनऊ-मौलाना कल्बे जवाद नक़वी साहब को टाइफाइड हो जाने से उनकी तबियत सीरियस हो गयी है,अचानक गफलत में चले जाने से दुआओ का सिलसिला जारी हैं।

मालूम हो शिया धर्म गुरु आफ़ताबे शरीयत की तबियत 1 हफ्ता पहले से नासाज़ चल रही थी।

सेव वक़्फ़ इंडिया के वाईस प्रेसिडेंट रिज़वान मुस्तफा ने उनसे बुधवार को मुलाक़ात की तो उन्होंने मुज़फ़्फ़रपुर में मौलाना शबीब काज़िम स

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सुन्नी भाई शीओ की आत्मा हैं,किसी भी शिया को परमिशन नहीं हैं की वो सुन्निओं बुरा कहे -डॉ कल्बे सादिक

 

इल्म का दिया जलाओ ,बेटिओ को पढ़ाओ ,दुनिया की  हिफाज़त करो-मौलाना रज़ा हैदर

लड़किओं को तालीम देकर सिर्फ फैमिली ही नहीं पूरा मुल्क और और जनरेशन फ़ैज़याब होती हैं-मौलाना तक़ी हैदर 

बाराबंकी। अपने लिए जीने वाले धार्मिक नहीं होते  दूसरो के लिए जीते हैं वो धार्मिक होते ,सुन्नी भाई शीओ की आत्मा हैं,किसी भी शिया  को परमिशन नहीं हैं की वो सुन्निओं  बु

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खुदर्गज सियासत और शिवभक्तों की मौत

सुमंगल दीप त्रिवेदी....

बीती रात को अमरनाथ यात्रियों पर हमले की खबर ने समूचे देश को झकझोर कर रख दिया। सोेशल मीडिया पर शोक संवेदनाओं का तांता लग गया। चारों ओर आतंकवाादियों के इस कृृत्य की निंदा की जाने लगी। लेकिन इन सबके बीच मानस पटल पर अचानक कई सवाल भी कौंधनेे लगेे। सभी के दिलोदिमाग मेें ऐसे सवाल उठने लाजमी हैं। भगवान शिव की पूजा-अर्चन क

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